आखा तीज पर पूरे राज्य में सक्रिय रहेगी टीम
बीकानेर। प्रदेश में अबूझ सावे का प्रतीक आखा तीज न केवल खुशियों का त्योहार है, बल्कि सदियों से यह बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई की काली छाया में भी रहा है। इस वर्ष भी आखा तीज और पीपल पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए गृह विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। सरकार ने इस बार ऐसा ‘चक्रव्यूह’ तैयार किया है कि सरकारी कारिंदे 24 घंटे हर गांव-ढाणी पर पैनी नजर रखेंगे।
विभागीय सूत्रों के अनुसार गृह विभाग ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने इस बार केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय की है। अब शादी के निमंत्रण पत्र पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि और उम्र का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने केवल परिजनों पर ही नहीं, बल्कि शादी से जुड़े हर पक्ष पर नकेल कसी है। हलवाई, बैंड वाले, पंडित, टेंट हाउस संचालक और ट्रांसपोर्टर्स से शपथ पत्र लिए जा रहे हैं कि वे किसी भी बाल विवाह का हिस्सा नहीं बनेंगे।
अक्षय तृतीया का अर्थ है जिसका ‘क्षय’ न हो। माना जाता है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती, इसलिए इसे ‘अबूझ सावा’ कहा जाता है। ग्रामीण इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार और अशिक्षा के कारण लोग इसी दिन बच्चों की शादियां कर देते हैं ताकि एक ही पंडाल और खर्चे में परिवार के कई बच्चों का ब्याह हो सके। पीपल पूर्णिमा को भी इसी तरह के आयोजनों के लिए चुना जाता है।
सरकारी तंत्र की 24 घंटे निगरानी
आखा तीज के दिन पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीमें सक्रिय रहेंगी। यदि किसी भी घर में बाल विवाह पाया जाता है, तो न केवल माता-पिता, बल्कि शादी में सहयोग करने वाले हर व्यक्ति पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
#Kaant K. Sharma / Bhawani Joshi
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