आषाढ़ गुप्त नवरात्रा 13 से, मंदिरों में होंगे विशेष अनुष्ठान
बीकानेर। मां भगवती की नौ दिवसीय साधना का पर्व गुप्त नवरात्र 13 जुलाई से शुरू हो रहे हैं, जो भड़ल्या नवमी यानि 21 जुलाई तक चलेंगे।
इस बार अमावस्या के साथ प्रतिपदा तिथि आ रही है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्र में की गई मंत्र साधना कभी भी निष्फल नहीं जाती है। इन नवरात्र में दस गुणा ज्यादा फल मिलता है।
महाकाल संहिता के अनुसार, सतयुग में चैत्र नवरात्र, द्वापर में माघ नवरात्र, कलियुग में अश्विनी नवरात्र और त्रेतायुग में आषाढ़ नवरात्र की प्रमुखता रहती है।
प्रतिपदा से नवमी तक महालक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होती है। देवी भागवत के अनुसार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ, बीज मंत्रों का जाप व शक्ति की साधना की जाती है।
नौ दिन रखे जाएंगे उपवास
गुप्त नवरात्र में नौ दिनों उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा यानि पहले दिन घट स्थापना करनी चाहिए। घट स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम मां भगवती की आराधना करते हुए मंत्रों की साधना करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र का उद्यापन करना चाहिए।
देवियों की होगी आराधना
जानकारी के मुताबिक गुप्त नवरात्र साधक दस महाविद्या की तंत्र साधना के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी की आराधना करते हैं।
देवी मंदिरों में चल रही तैयारियां
गुप्त नवरात्रा को देखते हुए देवी मंदिरों में तैयारियां की जा रही हैं। शहर के विजय भवन, नागणेचेजी मंदिर, सूरसागर के पास करणी माता मंदिर, पुरानी गिन्नाणी स्थित करणी माता, गायत्री शक्ति पीठ, अमरसिंहपुरा स्थित वैष्णों देवी मंदिर, जूनागढ़ स्थित कालका, चामुण्डा और करणी माता मंदिर, देशनोक स्थित करणी माता मंदिर अन्य देवी मंदिरों में व्यवस्थापक तैयारियों में जुटे हैं।