पांच हजार पद खाली, कैसे हो टीकाकरण

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मां और बच्चे की स्वास्थ्य जांच हो रही प्रभावित

बीकानेर। राज्य सरकार की ओर से यूं तो महिलाओं और बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं जिन पर करोड़ों रुपए भी खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन इन योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले पद ही खाली पड़े हैं। ऐसे में ये योजनाएं सिर्फ औपराचिकताएं बन कर रह गई हैं। ऐसी ही एक बानगी महिला एवं बाल विकास विभाग में समेकित बाल विकास सेवा के तहत चल रही योजनाओं के संचालन में देखी जा सकती है।

यहां टीकाकरण की जिम्मेदारी निभा रही आशाओं के लगभग पांच हजार पद खाली हैं। जिससे टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण योजना प्रभावित हो रही है। एक-एक आशा को दो से तीन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करवाने की ड्यूटी दे रखी है। ऐसी स्थिति में टीकाकरण कार्यक्रम सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।

हालांकि विभाग इन पदों को जल्द से जल्द भरने के दावे कर रहा है लेकिन चुनाव नजदीक आने की वजह से ये मुमकिन होता नजर नहीं आ रहा है।

गौरतलब है कि प्रदेश में कुल 63 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। एक केन्द्र पर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक सहायिका तथा एक आशा नियुक्त है। प्रदेश में आशाओं के कुल 55 हजार 816 पद भरे हुए हैं और कुल 4 हजार 879 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में टीकाकरण कार्यक्रम काफी प्रभावित हो रहा है।

ये है आशा सहयोगिनी

आशा सहयोगिनी ग्राम स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यकर्ता है। जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की ओर से मानदेय पर नियुक्ति दी गई है। आशाओं के माध्यम से ही मां व बच्चे की स्वास्थ्य जांच सेवाओं को सुनिश्चित किया जाता है।

दिए गए हैं संयुक्त निर्देश

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा समेकित बाल विकास सेवा ने संयुक्त रूप से पिछले साल जिला बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे और इन रिक्त पड़े पदों को शत-प्रतिशत भरने के लिए कहा था लेकिन आज तक इन निर्देशों की पालना करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जहमत नहीं उठाई है।

 

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