नगर विकास न्यास : मूलभूत सुविधाओं को तरसते लोग

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नगर विकास न्यास

कॉलोनाइजर्स ने कॉलोनियां काट कर बटोरी चांदी, नहीं दी सुविधाएं

बीकानेर। सरकार के आदेश पर नगर विकास न्यास ने सूरसागर को तो सिर्फ 15 दिनों में दुरुस्त कर दिया लेकिन न्यास की स्वीकृति पर काटी गई शहर की ऐसी कई कॉलोनियां हैं जहां रहने वाले हजारों लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।

जयपुर रोड पर स्थित विराट नगर और उसके आस-पास की कई कॉलोनियों में रहने वाले लोग पिछले 20 वर्षों से विकास की बाट जोह रहे हैं।

इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि नगर विकास न्यास ने इन्हें भूखण्डों के पट्टे तो जारी कर दिए लेकिन जब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा जाता है तो न्यास इन लोगों को खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र का इलाका बता कर टरका देता है।

मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से परेशान हुए इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग आज खाजूवाला विधायक और संसदीय सचिव डॉ.विश्वनाथ मेघवाल से मिले और उन्हें क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया।

विराट नगर समिति अध्यक्ष सेवानिवृत कर्नल अशोक चौहान ने बताया कि इन कॉलोनियों में ज्यादातर सेना से जुड़े लोग रह रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वे लोग लगातार क्षेत्र की समस्याओं से प्रशासन को अवगत करवाते आ रहे हैं लेकिन आज तक प्रशासन ने कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने बताया कि संसदीय सचिव को अवगत कराया गया है कि लोगों ने जीवन भर की कमाई से इन कॉलोनियों में घर बनाए हैं लेकिन इतने वर्षों बाद भी पानी, बिजली, सिवरेज और सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है।

कॉलोनी के परेशान हुए बाशिन्दों ने समस्याओं का समाधान जल्द नहीं होने की सूरत में कलक्टर कार्यालय के आगे धरना देने की बात भी कही है।

जानकारी के अनुसार संसदीय सचिव और खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा की क्षेत्र की समस्याओं को लेकर नगर विकास न्यास और जिला प्रशासन से बात कर समाधान किया जाएगा।

उन्होंने कहा की विधानसभा क्षेत्र उनका है लेकिन कॉलोनी नगर विकास न्यास की अनुमति से काटी गयी है। इस लिए सभी से बात कर समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस प्रकार की समस्याएं सिर्फ विराट नगर या आस-पास की अन्य कॉलोनियों में ही नहीं हैं बल्कि शहर में नगर विकास न्यास की स्वीकृति से काटी गई बहुत सी कॉलोनियों की हैं।

नगर विकास न्यास के अधिकारियों ने राजनीतिक और रसूखदारों के प्रभाव में आकर कॉलोनाइजर्स को कॉलोनियां काटने की स्वीकृति तो दे दी लेकिन इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कॉलोनाइजर्स को बाध्य नहीं किया।

जिसका खमियाजा इन कॉलोनियों में आशियाना बना कर रहने वालों को भुगतना पड़ रहा है।  साथ ही विभागों में तालमेल नहीं होने की वजह से भी इन कॉलोनियों में रहने वालों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है।

 

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