इस आशा सहयोगिनी ने अपने पति की करवा दी नसबंदी

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आशा सहयोगिनी
पुरुषों का डर दूर करने के लिए उठाया यह कदम, सरकार ने किया सम्मानित

जयपुर। प्रदेश की एक आशा सहयोगिनी ने पुरुष नसबंदी के बारे में पुरूषों का डर और हिचक दूर करने के लिए अपने घर से शुरूआत की और सबसे पहले अपने पति की नसबंदी कराई।

ललिता राठी नाम की इस आशा सहयोगिनी ने एक वर्ष में 25 पुरुष नसबंदी कराई। ललिता को प्रदेश की सरकार ने जनसंख्या दिवस पर हुए कार्यक्रम में पांच हजार रुपए और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया है।

प्रदेश में आदिवासी बाहुल्य जिले बारां में कार्यरत आशा सहयोगिनी ललिता के अनुसार पुरूषों में नसबंदी को लेकर कई तरह के डर और हिचक है। इसे दूर करना उसके लिए चुनौती था। इसके लिए सबसे पहले उसने पति को राजी किया। उसके पति महेन्द्र सिंह एक पेट्रोल पम्प पर काम करते है। ललिता के दो बच्चे हैं।

महेन्द्र सिंह ने दो वर्ष पहले नसबंदी कराई और इसके बाद ललिता ने अपने पति का ही उदाहरण देकर कई महिलाओं को इस बात के लिए प्रेरित किया वे अपने पतियों को पुरुष नसबंदी के लिए तैयार करें। इस काम में ललिता को सफलता मिली।

गौरतलब है कि बांरा में पिछले एक वर्ष 198 पुरुष नसबंदी हुई और इनमें 25 ललिता ने कराई। इनके अलावा 15 महिला नसबंदी भी कराई। गौरतलब है कि प्रदेश में सिर्फ 1.2 प्रतिशत पुरुष नसबंदी होती है।

 

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