बीकानेर पहुंची इसीजी की टीम, राउंड टेबल इंडिया है प्रायोजक
Bikaner / thenews.mobilogicx.com
रफ्तार और उड़ान के राजा गिद्ध की प्रजाति काफी संकट में है। यदि ध्यान नहीं दिया तो गिद्ध तो खत्म होने ही हैं, दुष्परिणाम इंसानों को भी भुग तना पड़ सकता है।
यह विचार तमिलनाडु के कोयम्बटूर से आए एन्वायरमेंट कन्जर्वेशन ग्रुप के आर मोहम्मद सलीम ने व्यक्त किए। सलीम ने बताया कि विशेष तौर पर गिद्ध प्रजाति यदि बचती है, प्रजनन सुचारू रहता है और संरक्षण संसाधन बढ़ते हैं तो इंसानों को बेहतर फायदे मिलेंगे।
भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियां पाई जाती हैं। पूरे भारत में अब केवल दो प्रतिशत ही गिद्ध बचे हैं और बीकानेर में इनकी संख्या अधिक है।
राउंड टेबल इंडिया इस शोध ग्रुप की प्रायोजक संस्था हैं। बीकानेर राउंड टेबल इंडिया के अध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बताया कि कोयम्बटूर से पूरे भारत में भ्रमण करके पक्षियों की संरक्षण व्यवस्था तथा पक्षियों के बारे में शोध करने ईसीजी के चार सदस्यों की टीम बीकानेर के होटल गजकेसरी पहुंची। अग्रवाल ने बताया कि कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात के बाद अब राजस्थान में जैसलमेर व बीकानेर के पक्षियों की स्थिति को जाना है।
राउंड टेबल इंडिया के आईपीसी दीपक अग्रवाल ने बताया कि चारों सदस्यों की टीम ने जोड़बीड़ में गिद्धों के झुंड को देख प्रसन्नता पूर्वक कहा कि बीकानेर ही ऐसा स्थान मिला जहां इतनी संख्या में एक साथ गिद्ध देखने को मिले। राउंड टेबल इंडिया के प्रशांत रामपुरिया ने बताया कि करीब 24 हजार किमी यात्रा करके शोध पूरा किया जाएगा। बीकानेर के बाद आसाम तथा पंजाब आदि होते हुए लगभग पूरे भारत में पक्षियों की प्रजाति पर रिसर्च किया जाएगा।
…ताकि बच्चों को भी देखने मिले पक्षी
फोर्मर डायरेक्टर व वैज्ञानिक डॉ. पीए अजीज ने बताया कि लुप्त हो रहे पक्षियों के प्रति हमें जागरूक होना होगा, नहीं तो हमारे बच्चों को पक्षी देखने को नहीं मिलेंगे। डॉ. अजीज ने बताया कि पक्षी पर्यावरण की सुंदरता तो बढ़ाते ही हैं लेकिन हर पक्षी की मानव जीवन के लिए एक अहम् भूमिका होती है। पक्षियों का फूलों पर मंडराना, खेतों में कीटों का सफाया करना जैसे बहुत ऐसे कार्य हैं जो पक्षी हमारे लिए करते हैं।
सफाई के दूत हैं गिद्ध, देते हैं फ्री सर्विस…
पूरे भारत भ्रमण के लिए एक गाड़ी है जिसमें सभी आवश्यक संसाधनों के साथ इसे ड्राइव करने वाले डॉ. रवि ऋषि एक चिकित्सक तो हैं ही साथ ही वाइल्ड लाइफ, फोटोग्राफी तथा पक्षियों के बारे में विशेष जानकारी रखते हैं। डॉ. रवि ऋषि बताते हैं कि गिद्ध ऐसा पक्षी है जो खुले में पड़े मवेशियों के शव को खाकर बदबू और गंदगी को खत्म कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने का कार्य करते हैं। वहीं पूरे इलाके को महामारी से भी बचा लेते हैं। डॉ. रवि ने बताया कि एक ओर जहां गिद्धों की असाधारण उच्च मृत्यु दर तेजी से बढ़ी है, वहीं इनकी प्रजनन दर भी असामान्य रूप से कम हुई है।
दवा बन रही गिद्धों के लिए काल…
मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिग्रीधारक थिलैई मकाधान ने भी बीकानेर में गिद्धों की अनेक फोटो निकाली है। थिलैई बताते हैं कि उन्हें प्राकृतिक फोटो खींचने की चाह रहती है तथा पक्षियों के बारे में भी अच्छी जानकारी रखते हैं। थिलैई ने गिद्धों के बारे में रोचक जानकारी देते हुए बताया कि मवेशियों के शव को यदि कुत्ते खाते हैं तो वे रेबीज जैसी बीमारी फैला देते हैं, जबकि गिद्ध इन शवों को खाते हैं तो कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। मात्र 20 मिनट में भैंस को कुछ गिद्ध मिलकर पूरा खा जाने की क्षमता रखते हैं। थिलैई ने बताया कि पशुओं में दर्द व सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डिक्लोफेनाक नामक दवा गिद्ध के लुप्त होने के बड़े कारण के रूप में सामने आई है। पशुओं के मरने पर गिद्ध इन्हें खाकर बीमार पड़ जाते हैं और धीरे धीरे इनकी मौत हो जाती है। हालांकि भारत में डिक्लोफेनाक दवा पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन इस दवाई का इस्तेमाल इंसानों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। इंसानों के शव को तो जलाया व दफनाया जाता है, लेकिन पशुओं को जब यह दवा दी जाती है तो पशुओं के मरने पर उन्हें गिद्ध खाते हैं, जिससे गिद्ध का जीवन संकट में आ जाता है।