पढ़ाने से पहले गुरुजी को लेनी होगी ट्रेनिंग

उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार को भेजा प्रस्ताव

बीकानेर। विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाने से पहले अब गुरुजी को खुद पढ़ना होगा। प्रदेश में उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए विभाग ने एक नया प्रस्ताव तैयार किया है।

जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भर्ती हो रहे नए शिक्षक अब सीधे कक्षाओं में पढ़ाने के लिए नहीं जा सकेंगे। प्रदेश के सभी राज्य स्ववित्त-पोषित विश्वविद्यालयों में भर्ती हो रहे नए शिक्षकों को विद्यार्थियों को पढ़ाने से पहले खुद को पढ़ना जरूरी होगा। जिसके तहत भर्ती होने के बाद पहले शिक्षकों को दो महीनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय में भर्ती हुए असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर्स को क्लास लेने से पहले यह ट्रेनिंग लेनी अनिवार्य होगी। इसके बाद ही वह कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ा सकेंगे।

इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव बनाकर प्रदेश की सरकार को भेज दिए हैं। जहां वित्त विभाग और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश के सभी स्ववित्तपोषित विश्वविद्यालयों में भर्ती हुए नए प्रोफेसर्स को पहले ट्रेनिंग लेनी होगी।

अलग से बजट का प्रावधान

अब तक सभी विश्वविद्यालयों में नई भर्ती होकर आने वाले शिक्षक सीधे कक्षाओं में जाकर पढ़ाना शुरू कर देते थे। कक्षा में जाने से पहले शिक्षकों को कहीं भी ट्रेनिंग नहीं दी जाती थी। जिससे शैक्षणिक स्तर में लगातार गिरावट आ रही थी, साथ ही शोध का स्तर भी गिर रहा था।

इसी को लेकर राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान ने भी चिंता जताई थी। जिसके तहत शिक्षण गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग की आवश्यकता बताई थी।

इसी के तहत विश्वविद्यालयों को दी जाने वाली अनुदान राशि में भी शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया है। ट्रेनिंग के पीछे शिक्षा विभाग का उद्देश्य शिक्षकों के शिक्षण स्तर को सुधारकर उच्च शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

 

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