पीएचडी प्रवेश परीक्षा खत्म करने की तैयारी

जयपुर/बीकानेर। शोध करने के इच्छुक विद्यार्थियों को कुछ राहत मिल सकती है। मानव संशाधन विकास मंत्रालय पीएचडी प्रवेश परीक्षा को जल्द खत्म कर सकता है। इसके लिए देश के शिक्षाविदें, विशेषज्ञों और शोधार्थियों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। रायशुमारी के बाद मंत्रालय इस बारे में फैसला करेगा।

जानकारी के मुताबिक यूजीसी के निर्देश पर सभी विश्वविद्यालयों ने देश में वर्ष-2009-10 से पीएचडी प्रवेश परीक्षा करवाना शुरू किया था। इससे पहले पीएचडी के लिए विद्यार्थियों के सीधे पंजीयन होते थे। इसके लिए स्नातकोतर कक्षा में संबंधित विषय में अंक देखे जाते थे।

यूजीसी ने शोध कार्य में गिरावट को देखते हुए पीएचडी प्रवेश परीक्षा शुरू की थी, लेकिन कई जटिलताओं से यह फॉर्मूला भी ज्यादा कामयाब नहीं हो रहा है।

यह आ रही हैं समस्याएं

विश्वविद्यालयों के पीएचडी प्रवेश परीक्षा करवाने के बावजूद शोधार्थियों को खास फायदा नहीं मिल रहा है। कई विश्वविद्यालयों और उनसे सम्बद्ध कॉलेज में शोधार्थियों के लिए गाइड ही उपलब्ध नहीं है।

प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद भी छह महीने के कोर्स वर्क और रजिस्ट्रेशन में देरी हो रही है। इसके अलावा संबंधित गाइड की शैक्षिक और प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के चलते पीएचडी समय पर पूरी नहीं हो रही है।

प्रवेेश परीक्षा अथवा पीएचडी में सीधे रजिस्ट्रेशन को लेकर मंत्रालय ने देश भर में शिक्षाविदें से सुझाव मांगे हैं। रायशुमारी मिलने के बाद एक उच्च स्तरीय समिति इसका अध्ययन करेगी और उसके बाद किसी फैसले की सिफारिश करेगी।

पहले वाली व्यवस्था पर विचार

मानव संशाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष-2021-22 से पीएचडी को कॉलेज, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की पात्रता बनाने का फैसला किया है। इसके अन्तर्गत पीएचडी धारक अभ्यर्थी ही शिक्षक बन सकेंगे। ऐसे में पीएचडी प्रवेश परीक्षा को खत्म करने का विचार किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार मंत्रालय का मानना है कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्र्तीण करने के बावजूद अभ्यर्थियों को निर्धारित अवधि में उपाधि नहीं मिल रही है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों की संख्या तेजी से घट रही है।

 

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