केन्द्र सरकार की योजना को लगा रहे पलीता
चुप हैं भाजपा के पदाधिकारी, गरीब हो रहे परेशान
बीकानेर। केन्द्र सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने का काम बीकानेर में दिल खोल कर किया जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार गरीब लोगों को राहत देने के दावे कर रही है और यहां उनके दावों को झुठलाने का काम ही सरकारी नुमाइन्दें कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ आज कलक्टर कार्यालय के सामने देखने को मिला।
सूर्यनगर के गरीब लोगों ने आज कलक्टर कार्यालय के सामने चीख-चीख कर जिला रसद अधिकारी की बेपरवाही और गैस एजेंसियों की ओर से स्वार्थसिद्धि के लिए किए जा रहे गड़बड़झाले को उजागर किया। लचर सिस्टम और भ्रष्ट सरकारी तंत्र से पीडि़त हुए लोगों ने बताया कि केन्द्र सरकार की उज्जवला योजना को जिला रसद अधिकारी और गैस एजेन्सियों के मालिक मिल कर फ्लॉप करने में लगे हैं।
उनके अनुसार इस योजना के तहत गैस एजेन्सियों ने आवेदन उनके ले लिए, आवेदन के साथ आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, फोटो सहित अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करा लिए लेकिन आज तक न तो सिलेण्डर मिला और न ही गैस चुल्हा। कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद पता लगा कि उनके नाम का कनेक्शन किसी ओर को जारी कर दिया गया।
सूर्यनगर में रहने वाली बीपीएल श्रेणी में आईं तुलसीदेवी गाडिय़ा लुहार ने बताया कि सरकार की ओर से नि:शुल्क मिलने वाले गैस कनेक्शन के लिए उसने कमला कॉलोनी के पास स्थित गैस एजेन्सी पर आवेदन किया था। काफी दिनों तक घर पर सिलेण्डर नहीं आया तो उसने अपने समाज के जागरूक लोगों को इस बारे में बताया।
लोग उसे नोखा रोड स्थित एक गैस एजेन्सी पर ले गए और वहां उसके आवेदन क्रमांक देकर पूछताछ की तो पता लगा कि इस आवेदन क्रमांक पर तो कनेक्शन जारी हो गया और वह भी मुन्नी देवी के नाम से। इस कनेक्शन पर तो कई सिलेण्डर भी आपूर्ति कर दिए गए हैं। यह सुनकर तुलसी देवी के होश उड़ गए।
फिर उन्होंने जनकिसान पंचायत के संरक्षक जयनारायण व्यास से सम्पर्क किया। फिलहाल उन्होंने प्रशासन को सोमवार तक इस बारे में कार्रवाई करने की मांग की है। अगर कार्रवाई नहीं होती तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
लोग बता रहे हैं कि ये तो सिर्फ एक मामला ही है, अगर पड़ताल की जाए तो बहुत से मामले ऐसे सामने आ जाएंगे। उन्होंने हैरानी जताई कि केन्द्र सरकार की योजना को बर्बाद किया जा रहा है और यहां जो भाजपा के पदाधिकारी हैं, उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है।
अगर वे चाहें तो यहां के सरकारी तंत्र और गैस एजेन्सियों की रिपोर्ट अपने आला पदाधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तो एक-दूसरे की टांग खींचने में ही लगे रहते हैं और योजनाएं कितनी फलीभूत हो रही हैं या नहीं हो रही हैं, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं दिखाई दे रहा है।