लोगों को राहत नहीं, कब्रों पर सजावट

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टैस्सीटोरी की समाधि स्थल पर किए जा रहे लाखों रुपए खर्च

बीकानेर। लोगों के पैसे को किस कदर व्यर्थ कामों में खर्च किया जा रहा है, यह इन दिनों यहां देखने को मिल रहा है। एक तरफ नगर के विकास का जिम्मा संभालने वाला निकाय कब्रों को सजाने में लाखों रुपए खर्च कर रहा है और वहीं दूसरी तरफ शहर के लोग मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि प्रदेश के सियासी गलियारों में अपना रौब रखने वाले जनप्रतिनिधि भी जनता के पैसे के दुरुपयोग पर मौन साधे बैठे हैं।

गौरतलब है कि इन दिनों राजविलास कॉलोनी स्थित इटली के नागरिक टैस्सीटोरी की कब्र को सजाने का कार्य किया जा रहा है।

ठेके के तहत किए जा रहे इस सौन्दर्यीकरण के कार्य में टैस्सीटोरी की कब्र पर ईंट-पत्थर से शेड बनाया जा रहा है। कब्र परिसर में अन्दर और बाहर की दीवारों पर लाल पत्थर लगवाए जा रहे हैं।

लोगों के मुताबिक इस कार्य में लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं शहर की बहुत सी प्रमुख सड़कों पर गड्ढ़ें हुए पड़े हैं। शहर के ज्यादातर लोगोंमोहल्लों और कॉलोनियों में जलभराव होता है। गली-मोहल्लों में नालियां नहीं बनी हैं। इस प्रकार की मूलभूत सुविधाएं भी शहर के बहुत से इलाकों में नहीं हैं। ऐसे में टैस्सीटोरी की कब्र पर लाखों रुपए खर्च किए जाना, लोग उचित नहीं मान रहे हैं।

लोगों के मुताबिक इतालवी नागरिक टैस्सीटोरी ने राजस्थानी भाषा के उत्थान में योगदान दिया था लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप शहरवासियों के हितों की अनदेखी कर उसकी कब्र की सजावट पर जनता के लाखों रुपए खर्च किए जाएं। हां, जब शहर में सबकुछ सही हो और निकायों के पास पर्याप्त धनराशि हो तब इन कामों पर जनता का पैसा खर्च किया जाना जायज माना जा सकता है लेकिन जनता तो विकास कार्यों के लिए तरस रही है और निकाय कब्रों को सजाने में लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हों तो इसे किसी भी सूरत में सही नहीं माना जा सकता है।

नहीं है पर्यटक स्थल

लोगों के मुताबिक टैस्सीटोरी समाधि स्थल पर्यटक स्थल नहीं है। यहां कभी भी किसी विदेशी पर्यटक को पहुंचते नहीं देखा गया है। साल में दो बार यहां जरूर कुछ लोगों को देखा जाता है।

एक तो टैस्सीटोरी के जन्मदिवस पर और दूसरा उनकी पुण्यतिथि पर। जब राजस्थानी भाषा के साहित्यकार गिनी-चुनी संख्या में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस स्थान पर लाखों रुपए खर्च किए जाना, समझ से परे ही है।

 

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