एक दिन, करोड़ों खर्च, फिर भी शहर बदहाल

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करोड़ों खर्च

लोगों की मूलभूत समस्याएं दरकिनार, सीएम अपनी सरकार का गुणगान करने में और नेता,-प्रशासन सीएम को खुश रखने में रहे व्यस्त

बीकानेर। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के एक दिन के दौरे के लिए करोड़ों रुपए खर्च हो गए लेकिन शहर के हाल फिर भी बदहाल ही रहे।

कई मंत्री, केन्द्रीय राज्यमंत्री और दर्जनों विधायक व नेताओं के साथ प्रदेश के आला प्रशासनिक अधिकारी भी शहर में कई घंटों तक मौजूद रहे लेकिन शहरवासियों की मन पीड़ा को किसी ने समझने की कोशिश नहीं की।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के दौरे को लेकर संभागभर से पुलिस जाब्ता बुलाया गया। ये सब पुलिसकर्मी महकमे के वाहनों से यहां आए।

सीएम के विभिन्न कार्यक्रमों में इधर से उधर भी पुलिस अधिकारी अपने सरकारी वाहनों से दौड़ते रहे। इन वाहनों में एक ही दिन में हजारों रुपए का इंधन फुंक गया होगा।

इसके अलावा मुख्यमंत्री के लिए दो स्थानों (मेडिकल कॉलेज मैदान और देशनोक) पर हैलीपेड बनाए गए। इन हैलीपेड पर भी हजारों रुपए का खर्च आया होगा।

इसके अलावा नागणेचेजी मंदिर, सादुल क्लब मैदान रवीन्द्र रंगमंच आदि स्थानों पर हुए कार्यक्रम के लिए टैन्ट आदि व्यवस्थाओं में भी सरकार का काफी रुपया खर्च हुआ है।

रवीन्द्र रंगमंच में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में मान लिया जाए कि संगठन का रुपया लगा है तो भी बाकि के कार्यक्रमों में तो सरकार का करोड़ों रुपए राजस्व खर्च हुआ ही है।

हैरानी की बात है कि सरकार के इसी राजस्व से शहर में कई मूलभूत सुविधाएं लोगों को उपलब्ध करवाई जा सकती थी।

जागरूक शहरवासियों के अनुसार मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को सही रखने और शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को सही करने के लिए विभिन्न इलाकों का दौरा कर सकती थीं, रेल फाटक बंद होने की समस्या के निस्तारण के लिए व्यापारियों से भी बात कर सकती थीं।

अगर वे चंद आम लोगों से उनकी समस्याएं सुन लेतीं तो सरकार का यहां आना भी सार्थक साबित कुछ तो हो जाता और आमजन में उनकी बात सुने जाने का संदेश भी पहुंचता। लेकिन एक दिन यहां रहने के बाद भी सीएम अपनी सरकार और पार्टी का गुणगान करती रहीं और यहां आए विभिन्न नेता, विधायक और प्रदेश स्तर के प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने में लगे नजर आए।

लोगों के मुताबिक रवीन्द्र रंगमंच में भी मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की ही बात सुनी है करोड़ों खर्चआमजन की नहीं।

 

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