सिर्फ नाम की है जिला यातायात प्रबंधन समिति
बीकानेर। कलक्टर सभागार में होने वाली जिला यातायात प्रबंधन समिति की कल होने वाली बैठक से शहर के बाशिन्दों में एक बार फिर से यातायात सुचारू होने की उम्मीदें जाग गई हैं। जिले में नए आए कलक्टर डॉ. एनके गुप्ता पहली बार जिला यातायात प्रबंधन समिति की बैठक लेंगे। ऐसे में शहरवासियों को उम्मीद है कि शायद उन्हें सीटी बसों की सुविधा जल्द मिलने लगे।
प्रशासननिक अधिकारियों की बेपरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की वजह से शहर के बाशिन्दों के लिए यहां सीटी बसों का संचालन होना एक सपने के होने जैसा ही है लेकिन जिस प्रकार से कलक्टर ने एलिवेटेड रोड के लिए कार्रवाई की, उसे देख कर शहरवासियों में यह उम्मीद जाग गई कि नए आए कलक्टर इस शहर में यातायात को सुचारू करने और आवागमन के लिए सबसे उपयुक्त साधन सिटी बसों की व्यवस्था शुरू किए जाने में कुछ रुचि दिखाएंगे।
गौरतलब है कि बदहाल यातायात से जूझ रहे शहर के बाशिन्दों को काफी समय से न तो सिटी बसों की सुविधा मिल रही है और न ही अन्य कोई लोकल परिवहन की सुविधा। ऐसे में यहां सिर्फ ऑटो चालकों और उनकी यूनियन के पदाधिकारियों की मनमर्जी ही चलती नजर आई है।
पिछले कई वर्षों में यह देखने में आया है कि समिति की निर्धारित समयानुसार बैठक कर खानापूर्ति कर दी जाती है। समिति के सदस्य अपने-अपने सुझाव देकर अपने कार्य की इतिश्री कर लेते हैं, उन सुझाव पर कितना अमल किया गया या नहीं किया गया, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं होता है।
समिति के सदस्यों की निष्क्रियता की वजह से ही आज शहर के लोग सिटी बस जैसी आवश्यक परिवहन सेवा के लिए तरस रहे हैं।
ऑटो स्टेण्ड भी सिर्फ नाम के
समिति की ओर से ऑटो स्टेण्ड कई वर्षों पहले स्थापित किए गए थे। उनमें से ज्यादातर स्टेण्ड पर ऑटो खड़े ही नहीं रहते हैं। ऑटो चालक यूनियन की ओर से स्टेण्ड दोबारा निर्धारित कर स्थापित किए जाने की मांग भी कई बार उठाई गई लेकिन हैरानी की बात है कि न तो प्रशासन ने ही इस बारे में कोई पहल की और न ही समिति ने।
शहर के जागरुक लोगों का मानना है कि राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए इस प्रकार की समितियों में शामिल करवा देते हैं। समिति में शामिल लोग सिर्फ अपने पद का रौब लोगों पर झाड़ते रहते हैं। समिति के कार्यों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं होता है।











