घर-घर कचरा संग्रहण की निविदा सात दिनों में निकालने का निर्णय
प्रतिपक्ष नेता ने कहा आ रही है भ्रष्टाचार की बू, इस्तीफा दें महापौर
बीकानेर। नगर निगम में स्वच्छता कमेटी की पहली मीटिंग आज महापौर की मौजूदगी में बंद कमरे में हुई। मीटिंग में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए निविदा सात दिनों में निकाले जाने, प्रत्येक वार्ड में 12-12 सफाईकर्मी नियुक्त करने जैसे कई निर्णय लिए गए।
कमेटी के सदस्य नहीं होने के बावजूद महापौर की इस मीटिंग में मौजूदगी और बंद कमरें में मीटिंग किए जाने पर निगम में नेता प्रतिपक्ष जावेद पड़िहार ने भ्रष्टाचार की बू आने की बात कहते हुए महापौर से इस्तीफा देने की मांग की है।
मीटिंग में ये लिए गए निर्णय
निगम स्वच्छता कमेटी के अध्यक्ष और वार्ड-60 के भाजपा पार्षद राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि आज हुई मीटिंग में शहर के पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए सात दिनों में निविदाएं जारी करने, दोनों क्षेत्रों में धरोहर राशि पांच-पांच लाख रुपए निर्धारित करने, प्रत्येक वार्ड में 12-12 सफाईकर्मी नियुक्त करने, शेष रहे सफाईकर्मियों को आबादी और क्षेत्र के हिसाब से वार्डों में तैनात करने, निगम की ओर से बताए गए स्थान पर ही घरों से संग्रहित किए गए कचरे को डाले जाने, कचरा संग्रहण करने वाले ऑटो रिक्शा वर्ष-18-19 के मॉडल होने जरूरी जैसे निर्णय लिए गए हैं।
बैठक में महापौर नारायण चौपड़ा, उपमहापौर अशोक आचार्य, आयुक्त प्रदीप गवांडे, उपायुक्त ताजमोहम्मद, राजेन्द्र पंवार, शम्भू गहलोत, दिव्या राजपुरोहित, लक्ष्मण व्यास, दाउलाल सेवग सहित कई पार्षदों के प्रतिनिधि, निगम कर्मचारी मौजूद रहे।
बंद कमरे में मीटिंग करने वाले प्रदेश के पहले महापौर : प्रतिपक्ष नेता
निगम में नेता प्रतिपक्ष जावेद पड़िहार का कहना है कि प्रदेश के ये पहले महापौर हैं जो बंद कमरे में मीटिंग करते हैं। एक तरफ तो प्रदेश की सरकार पारदर्शी कार्य करने की बात कहती है वहीं दूसरी तरफ उसी सरकार की पार्टी वाले महापौर बंद कमरे में मीटिंग कर रहे हैं। जबकि वे स्वच्छता कमेटी के सदस्य भी नहीं है। अगर उनके कमरे में स्वच्छता कमेटी की मीटिंग हो रही थी उस समय महापौर को नियमानुसार वहां से निकल जाना चाहिए था। इतना ही नहीं इस मीटिंग में कई पार्षदों के परिजनों की मौजूदगी होना भी बताया जा रहा है।
बंद कमरे में हुई इस मीटिंग से आमजन में संदेश गया है कि महापौर को अपनी पार्टी के पार्षदों पर भी भरोसा नहीं है। बंद कमरे में हुई इस मीटिंग से भ्रष्टाचार की बू आ रही है। नैतिकता के आधार पर महापौर को इस्तीफा दे देना चाहिए।











