जम्मू-कश्मीर : भाजपा और पीडीपी में टूटा गठबंधन

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भाजपा और पीडीपी

भाजपा महासचिव राम माधव ने की घोषणा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन टूट गया है। खुद भाजपा महासचिव और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी राम माधव ने यह घोषणा की।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि घाटी के हालात को देखते हुए गठबंधन में रहना सही नहीं है। वहीं, राज्य के उप मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने भी कहा है कि मैंने और हमारे सभी मंत्रियों-विधायकों ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है। संभावना है कि राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी आज शाम तक अपने पद से इस्तीफ दे सकती हैं।

राम माधव ने कहा कि राज्य में भाजपा का पीडीपी को अब समर्थन देना संभव नहीं है। हमने राज्य सरकार में हमारे उप मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता और अन्य सभी मंत्रियों से चर्चा की। सबकी सहमति से निर्णय लिया गया है जम्मू-कश्मीर में भाजपा अपनी भागीदारी को वापस लेगी।

हमने राज्य में गठबंधन के तहत तीन साल पहले सरकार बनाई थी। उस समय जनता का खंडित जनादेश था। चुनावी परिणाम में जम्मू का क्षेत्र पूर्ण रूप से भाजपा के पास था, वहीं घाटी में पीडीपी को सीटें मिली थीं। उस दौरान हमने कॉमन प्रोग्राम बनाया था।

पिछले तीन साल से ज्यादा समय से भाजपा अपनी तरफ से यह कोशिश में थी कि सरकार अच्छी तरह चले। सरकार के दो मुख्य लक्ष्य थे। पहला लक्ष्य शांति और दूसरा राज्य के प्रमुख हिस्सों में विकास को तेजी से आगे बढ़ाना।

माधव ने बताया कि राज्य के हालात को ठीक करने के लिए सीएम महबूबा मुफ्ती ने जो भी मदद मांगी है, केंद्र सरकार ने उन्हें वह दिया है। केंद्र से तमाम मदद मिलने के बावजूद राज्य सरकार घाटी में शांति कायम करने में असफल रही है। घाटी के विकास और अन्य कामों के लिए कुछ दिन पहले ही 18 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।

जम्मू कश्मीर में मीडिया की आजादी अब खतरे में आ गई है। घाटी में जिस तरह से पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की गई, वह निंदनीय है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास कार्यों में राज्य की पीडीपी सरकार की ज्यादा दखलअंदाजी करने के कारण केंद्र सरकार काम नहीं कर पा रही है। कश्मीर में केंद्र सरकार जो काम करना चाहती है वो नहीं कर पा रही है। चूंकि प्रदेश में पूरी तरह से बीजेपी की सरकार नहीं है, इसलिए विकास कार्यों के प्रोजेक्ट्स पर भी बीजेपी नेताओं को परेशानी हो रही है।

पीडीपी से अलग होने का फैसला देशहित और राष्ट्रहित को लेकर किया गया है। प्रदेश में गवर्नर प्रशासन लागू किया जाए और हालातों को काबू में करने की कोशिश की जाए।

 

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