हिरासती का पेट दो रुपए में कैसे भरें!

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महंगाई आसमान पर : भत्ता गुजरे जमाने का

बीकानेर। महंगाई भले ही आसमान छू रही है लेकिन पुलिस थाने में रखे जाने वाले अपराधियों के भोजन के लिए आज भी प्रति अपराधी दो रुपए ही मिल रहे हैं।
प्रत्येक पुलिस थाने में हर महीने तकरीबन 50 से 60 मुल्जिम खाना खाते हैं। इसक लिए संबंधित थाने को  पुलिस महकमे द्वारा 100 से 120 रुपए का भुगतान किया जाता है। आसमान छू रही महंगाई के दौर में एक तरफ 75 रुपए से कम एक वक्त का भोजन नहीं मिल पाता है वहीं दूसरी तरफ थानों में रखे जाने वाले अपराधियों के एक वक्त के खाने के लिए महज दो रुपए का भुगतान  दिया जा रहा है।
इतने कम भोजन भत्ते से पुलिस अधिकारी भी परेशान हैं, लेकिन विभाग के दशकों पुराने नियमों के चलते पुलिस भी बेबस है। हालांकि दबी जुबान में पुलिस अधिकारी ये भी बताते हैं कि कम भत्ते के चलते वो बिल भेजने से भी परहेज करते हैं।

भत्ते से ज्यादा उठाने का खर्च

मुल्जिमों का भोजन भत्ता मात्र दो रुपए होने का असर यह है कि थाने वाले इस भत्ते को उठा ही नहीं रहे हैं। इसका दूसरा कारण यह भी है कि कई बार तो इस भत्ते को उठाने का खर्च ही भुगतान से ज्यादा हो जाता है। भोजन भत्ता रजिस्टर में इन्द्राज करना, प्रतिदिन की रिपोर्ट अधीक्षक कार्यालय भेजना, भुगतान रिपोर्ट की फोटो प्रति भेजना सहित कई प्रक्रियाओं में सिपाहियों का समय व कागजात का आने वाला खर्च भत्ते से कई गुना ज्यादा बैठता है। इसी वजह से ज्यादातर पुलिस थानों में भत्ते का भुगतान नहीं उठाया जा रहा है।

काश! बेल हो जाए

पुलिस भी कम भोजन भत्ते के चलते हर मामले में चाहती है कि गिरफ्तार मुल्जिम को जमानत मिल जाए। थाने में पुलिस रिमाण्ड, शांतिभंग, चोरी, तस्करी, दुर्घटना सहित विभिन्न अपराधों में पकड़े गए आरोपियों की जमानत के पक्ष में पुलिस को हमेशा रहते देखा गया है। बावजूद इसके मजबूरी में पुलिस को मुल्जिमों को थाने में रखना पड़ता है और कम भोजन भत्ते के चलते अपनी रसोई का भोजन अपराधियों को परोसना पड़ रहा है।

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