फर्जीवाड़ा रोकने की कवायद, अवकाश और तबादलों में नहीं मिलगी सहानुभूति
बीकानेर। प्रदेश के सभी अराजपत्रित कर्मचारियों का अब हेल्थ रिकार्ड तैयार होगा। 50 वर्ष की उम्र तथा इसके बाद हर तीसरे वर्ष एक बार स्वास्थ्य की जांच अनिवार्य कर दी गई है।
स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट कर्मचारी के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन पर लगेगी। इस बारे में कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही स्वास्थ्य जांच का एक परफोर्मा भी सभी विभागों में भेज दिया गया है। निर्धारित प्रपत्र में स्वास्थ्य जांच करवाना जरूरी है, ताकि सरकारी कर्मचारियों का हेल्थ रिकार्ड डाटा तैयार किया जा सके।
जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य जांच केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज से संबंधित चिकित्सालय तथा जिला स्तरीय राजकीय चिकित्सालय में ही कराई जा सकेगी। विभाग के निर्देशों के अनुसार वर्ष-2017-18 तथा इसके बाद यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जा रही है। स्वास्थ्य जांच के लिए कर्मचारियों को अलग से कोई भत्ता नहीं मिलेगा।
प्रपत्र में हैं 14 बिन्दु
राज्य के अराजपत्रित कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी जांच के लिए तैयार किए गए प्रपत्र में 14 बिन्दु दिए गए हैं। जिसमें स्वास्थ्य संबंधी सभी विवरण दर्ज होगा। साथ ही जांच के आधार पर अन्य किसी जांच अथवा स्वास्थ्य संबंधी कोई राय देने के लिए तीन बिन्दु इस प्रपत्र में अलग से शामिल किए गए हैं।
लगेगा सच का पता
स्वास्थ्य जांच के लिए सरकार की मंशा फर्जीवाड़े पर निगरानी की है। सामान्य तौर पर बीमारी के आधार पर अवकाश या तबादलों में सहानुभूति बरती जाती है। ऐसे में हेल्थ रिकॉर्ड तैयार होने के बाद कर्मचारियों के स्वास्थ्य की भी सम्पूर्ण जानकारी सरकार के पास रहेगी और शिकायत की स्थिति में सत्यता जानने में भी समय जाया नहीं होगा।