सरकार का निर्णय : राजस्व का नुकसान

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करोड़ों की मशीनें हो रहीं खराब, कर्मचारी भी परेशान

बीकानेर। एक तरफ तो सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए नित नए नए जतन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे निर्णय भी ले रही है, जिनसे राजस्व को नुकसान हो रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण बीकानेर में देखने को मिल रहा है।

यहां सरकारी प्रेस को बंद कर अभिलेख म्यूजियम बनाने का निर्णय सरकार ने लिया है। जिसकी वजह से सरकार को राजस्व में करोड़ों रुपए के नुकसान होने की बातें सामने आ रही हैं।

जानकारी के मुताबिक इस सरकारी प्रेस को बंद करने के लिए सरकार के महकमे निदेशालय, मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग की ओर से 21 फरवरी, 2018 को यहां आदेश भेजा गया था। जिसमें यहां कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के लिए विकल्प पत्र भरवाने की जानकारी दी गई थी।

इसके बाद सरकारी प्रेस के कर्मचारियों ने इस निर्णय का विरोध किया लेकिन उनकी सुनवाई को दबा दिया गया। कर्मचारी लगातार इस छपाइ-खाने को बचाने के लिए यहां के विधायकों, सांसद तक पहुंचे और उनसे गुहार लगाई। यहां भी पार नहीं पड़ी तो वे प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंचे। मुख्य सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी फाइल मंत्रालय में चला दी गई है, जो भी निर्णय होगा, बता दिया जाएगा।

सालाना लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान

जानकारी के मुताबिक सरकारी प्रेस के बन्द हो जाने से सरकार को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान सालाना हो रहा है। इस प्रेस में हर वर्ष करोड़ों रुपए के दस्तावेजों की छपाई की जाती थी लेकिन सरकार के इस निर्णय से यहां छपाई कार्य बिल्कुल बंद कर दिया गया है। अभी भी यहां करोड़ों रुपए की मशीनें पड़ी हैं और लगभग दो लाख रुपए की छापी गई सामग्री भी यहां धूल फांक रही है।

फरवरी-18 में यहां कुल 42 कर्मचारी थे मौजूद

वर्ष के शुरुआत में इस सरकारी प्रेस में कुल 42 कर्मचारी कार्यरत थे। बंद करने का निर्णय आने के बाद 11 कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर यहीं अभिलेखागार में लगा दिया गया। 8 कर्मचारी जोधपुर और 2 कर्मचारियों को जयपुर की सरकारी प्रेस में भेज दिया गया। 6 कर्मचारियों को कलक्टर कार्यालय के तहत भेज दिया गया। शेष 15 कर्मचारी अभी भी यहीं हैं।

मूल विभाग ही दे रहा है वेतन

जानकारी के मुताबिक बीकानेर सरकारी प्रेस में कार्यरत सभी 42 कर्मचारियों को मासिक वेतन का भुगतान अभी भी मूल विभाग यानि निदेशालय, मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग की ओर से ही किया जा रहा है। जबकि 27 कर्मचारी अन्य विभागों में काम कर रहे हैं।

इतना ही नहीं शेष 15 कर्मचारी सरकार ने छपाई का काम भी मांग रहे हैं। हैरानी की बात है कि सरकार ने राजस्व को हानि पहुंचाने वाले इस निर्णय को किस सोच के साथ लिया है?

गौरतलब है कि सरकारी प्रेस के 15 कर्मचारियों ने आज यहां कलक्टर को ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के यहां आगमन पर उनसे मिलने के लिए समय दिलवाने की मांग की है।

 

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