गंगाशहर उपनगरीय क्षेत्र : निगम को अपने सालमनाथ नगर की सुध भी है!

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बीकानेर। वर्ष 1967 में आई हिन्दी फिल्म उपकार के गाने की पंक्तियां ‘कसमें वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या’ करीब सात वर्ष पूर्व नगर निगम की ओर से गंगाशहर उपनगर में संत सालमनाथ के नाम पर रखी आवासीय योजना के विकास के वायदों पर खूब जंचती है। निगम ने आज तक उन वायदों को पूरा नहीं किया है।

नगर निगम ने 2011-12 में इस योजना के माध्यम से करीब 4 करोड़ रुपए की कमाई की थी। योजना के तहत चिन्हित कुल 157 भूखंडों में से बिक्री केवल 122 भूखंड की ही की गई। जिसमें 110 भूखंडों को लॉटरी के माध्यम से तथा 12 भूखंड खुली बोली लगा कर बेचे गए।

लोगों ने निगम प्रशासन के वायदों पर भरोसा कर अपने खून-पसीने की कमाई से वहां भूखंड खरीद लिए, लेकिन अब वे पछता रहे हैं। निगम ने भूखंडों की बिक्री से हुई कमाई में से धेला भी यहां विकास के नाम पर खर्च नहीं किया। गंगाशहर-भीनासर गोचर भूमि से सटी इस कॉलोनी में निगम की अनदेखी के चलते पिछले 7 वर्षों में 122 भूखंडों में मात्र 4-5 लोगों ने ही अपने मकान बनाएं हैं। कुछ लोगों ने अपने भूखंड की सुरक्षा के लिए चार दीवारी बना रखी है।

भूखंडों के ऊपर से गुजरती बिजली की लाइनों के चलते भी कॉलोनी का विकास रुका हुआ है। कमोबेश यही स्थिति यहां के संपर्क मार्गों की है। यहां से न तो कोई सीधा सड़क संपर्क गंगाशहर से है और न ही सुजानदेसर से।

भूखंड बेचने के बाद निगम ने एक बार भी यहां की सुध लेने की जरूरत नहीं समझी। बेतरतीब कच्चे रास्तों के चलते यहां आवागमन नहीं के बराबर है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि यहां पर्याप्त खंभों के अभाव में रात को अंधेरा पसरा रहता है जिसके चलते हर समय अवांछित गतिविधि का भय उनके जेहन में रहता है।

यहां तक कि पिछले सात वर्ष में निगम अपनी इस कॉलोनी में पेयजल के लिए लाइनें नहीं डलवा सका, जिसके अभाव में लोगों को पीने का पानी भी खरीद कर पीना पड़ रहा है। लोग टैंकर अथवा ऊंट गाड़ों की टंकिया मंगवा कर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।

विकास के नाम पर बस अभी हाल ही में पूरे गंगाशहर उपनगर में डाली जा रही सीवरेज लाइन के साथ यहां भी सीवरेज बिछाई गई है।

भूखंड खरीदने वालों की माने तो वे यहां तक कहते हैं कि हम अपना भूखंड बेचना चाहते है लेकिन सालमनाथ नगर का नाम सुनकर ही खरीददार बिदक जाते हैं। निगम द्वारा इतने वर्ष बाद भी किसी भी तरह की सुविधा यहां उपलब्ध नहीं करवाने से भूखंड मालिक अपने ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

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