एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ सकता है प्रदेशवासियों को

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बीबीएमबी

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने दी चेतावनी

बीकानेर। अगले नौ महीनों तक प्रदेशवासियों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। ऐसी चेतावनी बीबीएमबी ने प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब राज्य को भी दी है।

प्रदेशवासियों के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के लोगों को पानी की कमी के चलते काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसका कारण है भाखड़ा बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी का भंडारण नहीं होना है। इसी वजह से बांध से अन्य राज्यों के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कटौती की जा रही है।

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने इस बारे में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सरकारों को चेतावनी दे दी है। बीबीएमबी ने कहा है कि अगर पोंग और भाखड़ा डैम में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ तो सितम्बर,2018 से लेकर मई, 2019 तक के लिए पेयजल के साथ सिंचाई के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

संभाग के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले तो पेयजल और सिंचाई के लिए पूरी तरह से नहरी पानी पर ही निर्भर हैं।

भाखड़ा, पौंग और रणजीत डैम की स्थिति देखते हुए बीबीएमबी ने कहा है कि राज्य अपने स्तर पर बारिश के पानी का प्रबंध करे और बीबीएमबी से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर न रहे। बीबीएमबी के चैयरमेन के मुताबिक पानी का संकट कितने चलेगा, यह नहीं कहा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक इस समय तीनों राज्यों की औसत मांग 43 हजार क्यूसेक होगी, जबकि बीबीएमबी केवल 17700 क्यूसेक ही छोड़ पाएगा। हालांकि फिलहाल बिजली उत्पादन पर कोई असर नहीं है लेकिन आने वाले समय में बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

बताया जा रहा है कि बीबीएमबी के चैयरमेन बीके शर्मा ने तीनों राज्यों के प्रिंसीपल सैकेट्री की बैठक बुलाकर सारी स्थिति से अवगत करवा दिया है।

इस अवसर पर पंजाब के प्रिंसीपल सैकेट्री (सिंचाई) जसपाल सिंह ने सुझाव दिया कि बीबीएमबी को स्टडी करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि कैचमेंट एरिया में बारिश कितनी हो रही है, बर्फ पिघलने से कितना पानी बांधों में आ रहा है, ताकि इस डाटा के आधार पर लॉंग टर्म तैयारी की जा सके। बोर्ड की बैठक में इन सुझावों को मान लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से भाखड़ा का इनफ्लो भी पिछले साल के मुकाबले इस साल मात्र आधा ही चल रहा है। पिछले साल आज के दिन 79 हजार क्यूसेक पानी की आमद थी, जो इस साल 35502 क्यूसेक ही आ रहा है। पौंग बांध का हाल तो इससे भी ज्यादा बुरा है। पिछले साल एक लाख क्यूसेक पानी आ रहा था।

 

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