9 अगस्त को होगा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव

विपक्ष के लिए एक बार फिर परीक्षा की घड़ी

नई दिल्ली। राज्यसभा के उप सभापति का चुनाव इसी सप्ताह नौ अगस्त को होगा और इसके लिए आठ अगस्त तक नामांकन किए जा सकते हैं। सदन के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने आज राज्यसभा में इस आशय की घोषणा की।

इसके साथ ही अब सदन में सरकार और विपक्ष के बीच एक नई रस्साकशी देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव को विपक्षी एकजुटता की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।

राज्यसभा में सरकार बहुमत में नहीं है। इसलिए छोटे दलों के सांसद भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे। हालांकि एनडीए की तरफ से जेडीयू सांसद हरिवंश को उपसभापति का उम्मीदवार बनाया गया है।

चुनाव में तीन क्षेत्रीय दलों बीजू जनता दल, टीआरएस और वाईएसआरसीपी की निर्णायक भूमिका को देखते हुए एनडीए और विपक्षी पार्टियां इन छोटे दलों को लुभाने में जुटी हुई हैं। हरिवंश बिहार के जाने माने पत्रकार रहे हैं। विपक्ष की ओर से अभी तक किसी उम्मीदवार को लेकर आम सहमति नहीं बनी है।

उप सभापति का चुनाव एक बार फिर विपक्षी एकता का परीक्षण है। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। पहले कहा जा रहा था कि टीएमसी से कोई एक उम्मीदवार हो सकता है। जिस पर पूरा विपक्ष राजी होगा। लेकिन टीएमसी ने खुद को इस रेस से बाहर कर लिया है।

कांग्रेस ने अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। वहीं चर्चा है कि टीएमसी की ओर मना करने के बाद उम्मीदवारी शरद पवार की पार्टी एनसीपी को मिल सकती है।

इन तीन पार्टियों के 17 सदस्य राज्यसभा के अगले उपसभापति चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जहां सत्तारूढ़ दल के रणनीतिकार भी इन तीनों दलों के संपर्क में हैं। क्योंकि इन पार्टियों ने पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। बीजेडी ने हालांकि उप राष्ट्रपति चुनाव के लिये कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया था।

गौरतलब है कि 245 सदस्यीय सदन में जीतने वाले उम्मीदवार को 122 मतों की जरूरत होगी। भाजपा राज्य सभा में सबसे बड़ी पार्टी है। उसे 106 सदस्यों का समर्थन हासिल है। इसमें एआईडीएमके के भी 14 सदस्य शामिल हैं।

राज्यसभा में 67 सांसदों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बदले हालात में तेलगु देशम पार्टी के उससे नाता तोड़ने और शिव सेना के साथ रिश्ते खराब होने के बाद भाजपा के लिए उपसभापति पद के चुनाव का सामना कर पाना आसान नहीं रह गया।

कांग्रेस पार्टी की सदस्य संख्या 51 रह गई है, लेकिन विपक्षी एकता के बदले हालात में तृणमूल कांग्रेस के 13, समाजवादी पार्टी के 6, टीडीपी 6, डीएमके के 4, बसपा के 4, एनसीपी के 4 माकपा 4, भाकपा 1 व अन्य गैर भाजपा पार्टियों की सदस्य संख्या को मिला दें तो वे भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं। हालांकि 13 सदस्यों वाली अन्नाद्रमुक भाजपा के साथ जाएगी।

ऐसे आसार हैं लेकिन 9 सदस्यों वाला बीजू जनतादल व शिव सेना समेत कुछ और दल अगर तटस्थता बनाए रखते हैं तो इससे विपक्षी पलड़ा भारी होना तय है। राज्यसभा के उप सभापति पीजे कुरियन के जुलाई में सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त है।

 

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