राजस्थान और यूपी में है ज्यादा दिक्कतें
बीकानेर। पिछले दिनों दिल्ली से सटे फरीदाबाद में एक सरकारी होटल में हुई भाजपा और संघ के नेताओं की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद भाजपा के दर्जनों सांसदों में टिकट कटने का भय समा गया है।
सूत्रों के मुताबिक संघ ने संगठन मंत्रियों से अपने-अपने प्रभार क्षेत्र वाली सभी संसदीय सीटों का सामाजिक-राजनीतिक समीकरण की विस्तृत विवरण, सांसद के कार्यों, कमियों, क्षेत्र की समस्याओं के बारे में जुलाई के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
इस रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि वर्ष : 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में किन सांसदों को फिर से टिकट देना उचित रहेगा, किनको नहीं।
सूत्रों ने बताया कि भाजपा के लगभग 90 सांसदों की टिकट कटने की संभावना है। सबसे ज्यादा राजस्थान और यूपी के दर्जनों भाजपाई सांसदों का टिकट कट सकता है। जिनसे जनता में नाराजगी, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोपों के मामलों की रिपोर्ट आएगी, उन पर नये सिरे से विचार किया जाएगा।
सपा-बसपा के गठबंधन के मद्देनजर यूपी में सत्ता विरोधी लहर की काट के लिए भाजपा अन्य राज्यों से ज्यादा यहां के सांसदों की टिकट काट सकती है।
सूत्रों का कहना है कि जिस रिपोर्ट को टिकट देने का आधार बनाया जाएगा, उसको लिखने वाला कौन है, यह भी देखना होगा। संघ व भाजपा में बहुत से संगठन मंत्री ऐसे हैं जिन पर जातिवाद और सेवा सुविधा के प्रभाव में आकर किसी को आगे बढ़ाने, किसी को काटने के आरोप लगते रहे हैं।
ऐसे पदाधिकारी अपनी जाति के लोगों को टिकट दिलवाने, दूसरी जाति के लोगों का टिकट कटवाने के लिए विरोध में रिपोर्ट दे सकते हैं।
यूपी में कुछ संगठन मंत्रियों के तबादले कुछ दिन पहले ही किए गए हैं। उनमें कई के तबादलों का एक कारण यह होना भी बताया जा रहा है। इसलिए यदि रिपोर्ट को आधार बना कर इतने सांसदों का टिकट काटा गया तो इस पर बहुत बवाल मच सकता है।











