शिकायत होने के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
बीकानेर। आंगनबाड़ी केन्द्रों में गड़बड़झाला किस तरह किया जा रहा है इसका एक उदाहरण देशनोक में चल रहे कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में इन दिनों देखा जा सकता है। यहां के आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालक दस्तावेज में कूटरचना कर पोषाहार को अपने काम में लेते दस्तावेजों में देखे जा सकते हैं।
इसकी शिकायत महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक को की गई, बावजूद इसके दोषी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आई है।
जानकारी के मुताबिक देशनोक के वार्ड 2, 3 और 13 स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र संचालक ने 4 अप्रेल, 2017 के दिन बच्चों की उपस्थिति बताकर उन्हें पोषाहार वितरण करने का ब्यौरा दस्तावेजों में अंकित कर रखा है। चौंकाने की बात तो यह है कि इस दिन रामनवमी का अवकाश देश भर में था। इतना नहींं वार्ड-3 स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र संचालक ने तो 2 जुलाई, 2017 को रविवार के दिन भी बच्चों की उपस्थिति दिखाते हुए उन्हें पोषाहार वितरण करना दस्तावेज में दर्शाया है। ये गड़बड़ियां तो वे हैं जो जल्दी पकड़ में आ जाती हैं। इनके अलावा इन आंगनबाड़ी केन्द्रों में उन बच्चों के नाम भी दर्ज कर लिए गए हैं, जो आज तक पैदा ही नहीं हुए।
देशनोक में रहने वाले एक जागरूक नागरिक बताते हैं कि उनके पड़ौस में पवन मोदी नाम के शख्स रहते हैं। उनके दो बेटियां हैं, लेकिन वार्ड 7 के आंगनबाड़ी केन्द्र के उपस्थिति रजिस्टर में पवन मोदी के बेटे का नाम वैभव मोदी दर्ज है और वह रोजाना वहां पोषाहार खा रहा है।
वार्ड 9 स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र संचालक ने तो हद ही कर दी। दो महीने में एक बच्चे का ही पिता बदल दिया। जानकारी के अनुसार इस आंगनबाड़ी केन्द्र के उपस्थिति रजिस्टर में जनवरी, 2017 में रौनक नाम के बच्चे के पिता का नाम कन्हैयालाल दर्शाया गया। वहीं मार्च, 2017 में रौनक के पिता का नाम बदल कर राजूराम लिख दिया गया।
जानकार लोगों के मुताबिक सरकार तो बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाकर लाखों रुपए खर्च कर रही है लेकिन कुछ लोग अपने स्वार्थपूर्ति के लिए इन योजनाओं की आड़ में सरकार को चूना लगा कर अपना घर भर रहे हैं।
विभाग की उपनिदेशक तक पहुंची शिकायतें
देशनोक के आंगनबाड़ी केन्द्रों में किए जा रहे गड़बड़झाले की शिकायतें महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक तक पहुंच गई। कस्बे में रहने वाले भवानीशंकर दर्जी ने वार्ड 7 स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र के उपस्थिति रजिस्टर में अपनी पत्नी, बेटी और बेटे का नाम लिखा होने और उन नामों पर सूखा पोषाहार लिए जाने की शिकायत की है। लिखित में दी गई इस शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि उसकी पत्नी, बेटी और बेटे कभी आंगनबाड़ी गए ही नहीं, उन दोनों के नाम से फर्जी तरीके से पोषाहार उठाया जा रहा है।
इसी प्रकार कस्बे में ही रहने वाले मनोजकुमार ने भी इसी आंगनबाड़ी केन्द्र के उपस्थिति रजिस्टर में अपने बेटे का फर्जी तरीके से नाम लिखकर पोषाहार उठाए जाने की शिकायत की है।
जांच तक ही सिमटी कार्रवाई
आंगनबाड़ी केन्द्रों में की जा रही इस गड़बड़ी की शिकायतें मिलने पर विभाग की उपनिदेशक ने बाल विकास परियोजना अधिकारी, ग्रामीण और महिला पर्यवेक्षक को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
इस मामले की जांच विभाग के सहायक लेखाधिकारी विनोद शर्मा, सीडीपीओ शक्तिसिंह और महिला पर्यवेक्षक नीतू तिवाड़ी ने की और उसकी रिपोर्ट उपनिदेशक को दे दी। जांच रिपोर्ट आने के बाद उपनिदेशक रचना भाटिया ने इस मामले की जांच रिपोर्ट करने वाले अधिकारियों को 27 जून, 2018 को लिखित में आदेश दिए कि वे सात दिनों में शिकायतकर्ता को कहें कि आरोपों को सिद्ध करने बाबत कोई प्रमाण देवेंं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसी महीने की 5 जुलाई को जांचकर्ताओं को साक्ष्य भी उपलब्ध करवा दिए।
हैरानी की बात तो यह है कि तब से आज 15 दिन बीत चुके हैं लेकिन सरकार को चूना लगाने वालों के खिलाफ विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
जांच में भी गड़बड़
जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में वर्ष 2016-17 में गड़बड़ी करने की शिकायत की है, जबकि जांच करने वाले अधिकारी जनवरी 2018 से लेकर अप्रेल 2018 तक के दस्तावेजों की जांच करके अपनी रिपोर्ट पेश कर रहे हैं।
अचरज की बात है कि अपने चहेतों को बचाने के लिए विभाग के ये अधिकारी हिन्दी भाषा में लिखी शिकायतों को भी अपनी जांच का आधार नहीं बना पा रहे हैं। शिकायतों के आधार पर जांच नहीं किए जाने से लोग उनकी योग्यताओं पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं और सरकारी अधिकारियों को भ्रष्ट बताने लगे हैं।
नहीं सुन रहे अधिकारी
शिकायत करने के बाद भी अधिकारी नहीं सुन रहे हैं। पहले अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट की कॉपी दी और आरोपों को सिद्ध करने के लिए साक्ष्य देने को कहा, मैने सभी साक्ष्य 5 जुलाई को दे दिए थे। इसके बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
मगनलाल जीनगर, जागरूक नागरिक, देशनोक।











