करोड़ों का खर्च, सरकार के फूले हाथ-पैर

बजट में नि:शुल्क एंजियोग्राफी की घोषणा

बीकानेर। मुख्यमंत्री की ओर से इस वर्ष की गई बजट घोषणाओं में हृदय रोगियों की नि:शुल्क एंजियोग्राफी की घोषणा को अमलीजामा पहनाने में करोड़ों का खर्च देख कर सरकार के हाथ-पैर फूल गए हैं। इस घोषणा को पूरा करने में सरकार और वित्त विभाग बैकफुट पर जाते नजर आने लगे हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष बजट पेश करते वक्त मुख्यमंत्री ने विधानसभा में प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हृदय रोगियों की एंजियोग्राफी जांच नि:शुल्क करने की घोषणा की थी। जब इस घोषणा को लागू करने का समय आया तो खर्च देखकर सरकार और वित्त विभाग के हौसले पस्त हो गए। अब इस घोषणा की पत्रावली वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच घूम रही है।

जानकारी के मुताबिक इस घोषणा को लागू करने से पहले सरकार ने मेडिकल कॉलेजों से एंजियोंग्राफी का खर्च आंकलन किया गया तो सालाना करोड़ों रुपए का खर्च होने का आंकलन सामने आया। लिहाजा पत्रावली को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को भेज दिया। अब पत्रावली वित्त विभाग और सीएम कार्यालय के बीच चल रही है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उच्च स्तर से जिस तरह के निर्देश मिलेंगे, उस हिसाब से ही घोषणा को क्रियान्वित करने का कार्य किया जाएगा। जानकार बताते हैं कि जयपुर के एसएमएस हॉस्पीटल में प्रतिदिन 20 से ज्यादा एंजियोंग्राफी की जा रही है।

हृदय अस्पताल में काफी समय से बंद पड़ी है कैथ लैब

पीबीएम परिसर स्थित हृदय अस्पताल में तो एंजियोग्राफी करने वाली मशीन कैथ लैब ही काफी समय से खराब पड़ी है। इसे ठीक कराने के लिए सरकार और हृदय रोग अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ठोस कोशिशें होते नहीं देखी गई हैं। यहां भी हृदय रोगियों की संख्या में रोजाना इजाफा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक यह कैथ लैब लगभग 19-20 साल पुरानी है। यह मशीन अब खारीज हुई मशीनों की श्रेणी में पहुंच चुकी है। अस्पताल प्रशासन को यहां नई कैथ लैब मशीन लगवाने के लिए प्रस्ताव बना कर सरकार को भेजने चाहिए।

सरकारी कैथ लैब खराब होने की वजह से हृदय रोगियों को मजबूरन बाहर निजी अस्पताल में जाकर एंजियोग्राफी करवानी पड़ रही है, जिसमें बहुत खर्च उन्हें वहन करना पड़ रहा है।

 

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