कोटगेट पुलिस ने पकड़ा शातिर ठग, 12 राज्यों में है वांछित

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चार अप्रेल को अम्बेडकर सर्किल स्थित होटल में दो युवतियों और एक युवक से ठगे थे करीब साढ़े तीन लाख रुपए।

बीकानेर। कोटगेट पुलिस ने लगभग ढाई महीने के अथक अनुसंधान के बाद एक शातिर ठग को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। 12 राज्यों में दर्जनों लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले इस शातिर अपराधी को पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के उना में स्थित एक शाही होटल से गिरफ्तार किया है। इस मामले की पड़ताल करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक सवाईसिंह गोदारा ने रविवार को मीडिया को बताया कि इस ठग ने यहां 4 अप्रेल-2018 को अम्बेडकर सर्किल स्थित मरुधर होटल में तीन जनों को नशीला पदार्थ खिला कर ठगी का शिकार बनाया था। इस बारे में अनिलकुमार ने कोटगेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में अनुसंधान का जिम्मा कोटगेट थाने के उपनिरीक्षक अजयकुमार को सौंपा गया था।

उन्होंने थानाधिकारी अरविन्द भारद्वाज के निर्देशन में साइबर सेल के कांस्टेबल दीपक यादव के साथ मिलकर मामले की ढाई महीने तक गहनता से तहकीकात की। जिसके परिणामस्वरूप आरोपी ठग को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने बताया कि राजेन्द्रसिंह नाम के इस शातिर ठग ने मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, बिहार, गोवा, हिमाचलप्रदेश, हरियाणा सहित कई प्रदेशों में बेरोजगार युवक-युवतियों को विदेश में नौकरी दिलवाने की आड़ में ठगी का शिकार बना चुका है।

राजस्थान में इसने अलवर, बीकानेर और श्रीगंगानगर में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है।

ऐसे आया जाल में

परिवादी अनिलकुमार और दो युवतियों को एक होटल में ठगी का शिकार बनाने के बाद आरोपी यहां से निकल गया था। अनुसंधान अधिकारी अजयकुमार और दीपक यादव ने आरोपी द्वारा वारदात में उपयोग किए गए मोबाइल, ईमेल आईडी का विश्लेषण किया तो सामने आया कि ये समाचार पत्रों में फर्जी विज्ञापन देकर बुलाता और उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर शिकार बनाने का पुराना अभ्यस्त है।

पुलिस को आरोपी की कॉल डिटेल से विशेष सहयोग नहीं मिला। इस पर उन्होंने समाचार पत्र में विज्ञापन के जरिए शिकार हुए लोगों से दस्तावेज मंगवाए जाने के लिए उपयोग में ली गई ईमेल आईडी की पड़ताल शुरू की तो आरोपी की दस से बारह ईमेल आईडी सामने आईं। जिनकी विस्तृत जानकारी गूगल से ली गई और उनके आईपी एड्रेस का विश्लेषण किया गया।

आरोपी होटल में ठहरने के लिए ऑनलाइन बुकिंग करवाता था। ऑनलाइन वेबसाइट याहू, जीमेल, मोबिक्विक, फेसबूक, गूगल, पेटीएम का उपयोग करता था। अनुसंधान अधिकारी ने इन्हीं सब कम्पनियों से संबंधित डेटा एकत्रित किए। साथ ही साथ अनुसंधान में जुटे अजयकुमार और दीपक यादव रोजाना विभिन्न राज्यों के समाचार पत्रों को भी पढ़ते थे।

दो दिन पहले हिमाचलप्रदेश के एक समाचार पत्र में इसी तरह का एक फर्जी विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। जांच अधिकारी ने आरोपी की गतिविधियों को चिन्हित किया और आला अफसरों को अवगत कराया। इस पर पुलिस अधीक्षक ने एसआई अजयकुमार, कांस्टेबल दीपक यादव, जगदीश और राजेश की टीम बनाकर हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना किया। इस तरह वहां के शाही होटल से आरोपी ठग को गिरफ्तार कर लिया।

दस लाख से ज्यादा कॉल का किया विश्लेषण

ढाई महीनों के इस अनुसंधान के दौरान उपनिरीक्षक अजयकुमार और साइबर सेल के कांस्टेबल दीपक यादव ने तकरीबन सौ मोबाइल नम्बरों, 70 से 75 मोबाइल टॉवर से प्राप्त डेटा, दस लाख से ज्यादा कॉल डिटेल का विश्लेषण किया है। इतना ही नहीं इन ढाई महीनों में कई राज्यों के सैंकड़ों समाचार पत्रों का नियमित रूप से अध्ययन भी किया है।

सूनसान रास्ते में फेंक देता था मोबाइल

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी राजेन्द्रसिंह नाम का यह ठग हर वारदात में नए नम्बर और मोबाइल का उपयोग करता था। वारदात में उपयोग लिए गए मोबाइल सिम और हैंडसैट को ये सूनसान जगह पर फेंक देता था।

यहां 4 अप्रेल को वारदात करने के बाद इसने नाल में किसी सूनसान जगह पर सिम और हैंडसैट फेंक दिए थे और हवाई जहाज से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था। वारदात करने के बाद यह तुरंत दूसरे स्थान के लिए किसी किराए के वाहन या हवाई जहाज से रवाना हो जाता था।

आरोपी शख्स जोसेफ, जॉन डिसूजा, थॉमस, मयंक, दिनेश, हिमांशुकुमार आदि नाम बदल कर ठगी की वारदातों को अंजाम देता रहा था।

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