भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के लिए न्यूट्रल नाम पर मंथन

वसुन्धरा राजे हो सकती हैं आखिरी विकल्प, पीएम-सीएम की आज शाम को भोज बैठक

जयपुर। पिछले दो महीनों से उलझी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के नाम की गुत्थी अब मध्य मार्ग में उलझ गई है। दोनों ही धड़ों की पसन्द के नाम पर मंथन के बीच शनिवार शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की प्रस्तावित भोज बैठक निर्णायक साबित हो सकती है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ कयास लगा रहे हैं कि ‘न तेरी न मेरी’ की तर्ज पर कोई चौंकाने वाला फैसला भी सबके सामने आ सकता है।

प्रदेश में नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का नाम तय करने के लिए पिछले चार दिनों से देश की राजधानी दिल्ली राजस्थान की राजनीतिक का केन्द्र बनी हुई है। पार्टी के सामने दिक्कत है कि मौजूदा हालात में जो फैसला होगा, इसमें एक धड़े को तो नीचा देखना ही होगा। चाहे पार्टी आलाकमान अपनी पसंद के नाम से कदम पीछे खींचे या केन्द्र अपनी पसंद को थोपे। दोनों ही मामलों में होने वाले नुकसान की चिंता ने पार्टी के रणनीतिकारों को उलझा कर रख दिया है।

संघ का बढ़ रहा दखल

संघ की ओर से अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले में दखल बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के नेता ओमप्रकाश माथुर की पिछले दो दिनों से सामने आई भूमिका को इसी रूप में देखा जा रहा है। आलाकमान की पसंद गजेन्द्र सिंह शेखावत खुद संघ की पृष्ठभूमि से हैं और जिस तरह से शेखावत के बाद वसुन्धरा राजे की माथुर के साथ हुई मुलाकात की बातें सामने आई हैं, उसे देख कर माना जा सकता है कि संघ की ओर से ही बीच का कोई रास्ता निकालने की सलाह दी गई है।

इसके बाद पार्टी आलाकमान और प्रदेश की मुख्यमंत्री की पसंद-नापसंद के बीच अब ऐसे किसी नाम पर मंथन किया जा रहा है, जिस पर दोनों ही धड़ों को कोई आपत्ति न हो और नए अध्यक्ष की नियुक्ति में बरबाद हुए दो महीनों का डेमेज कन्ट्रोल भी हो जाए।

नहीं लेना चाहते हैं बड़ा रिस्क

राजनीतिक जानकारी रखने वालों का कहना है कि संघ भी यह मान रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति में राजे की अनदेखी से पार्टी को कोई फायदा नहीं है। चूंकि चुनाव में चार-पांच महीनों का समय रह गया है। ऐसे में पार्टी आलाकमान को कोई बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहिए।

इसी बीच राजस्थान राज्य सभा सांसद भूपेन्द्र यादव का नाम भी प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए सामने आ रहा है लेकिन इस नाम का चुनावी साल में कोई फायदा नहीं मिलने का भरोसा पार्टी के नेता तक नहीं कर पा रहे हैं।

वसुन्धरा राजे भी है आखिरी विकल्प

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी ने प्रदेशाध्यक्ष का नाम तय करने में पहले से ही दो महीनों का वक्त जाया कर दिया। फिर भी आलाकमान और राजे में प्रदेशाध्यक्ष के नाम को लेकर कोई विवाद रहता है तो कोई चौंकाने वाला फैसला भी सबके सामने आ सकता है। इसमें खुद वसुन्धरा राजे को ही सीएम की कुर्सी के साथ पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष का पद सौंपने का विकल्प हो सकता है, लेकिन पार्टी इसे आखिरी विकल्प के रूप में ही इस्तेमाल करना चाहती है।

फिलहाल आज शाम को होने वाली पीएम-सीएम की भोज बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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