फटी-पुरानी किताबें पढ़ने को बच्चे मजबूर

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किताबें

कई विषयों की अभी तक नहीं आई नई किताबें

बीकानेर। प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में सत्र शुरू हुए दो महीनों से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक विद्यार्थियों के पास सभी विषयों की किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। हजारों बच्चों को फटी-पुरानी किताबों के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है।

प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी सरकार की ओर से दी जाने वाली नि:शुल्क किताबों को लेकर परेशान हैं। हालात ये हैं कि उनके पास पढ़ने के लिए किताबें भी पूरी नहीं हैं।

जानकारी के मुताबिक इस बार बोर्ड ने कई किताबों में बदलाव किया है। इस वजह से किताबों के प्रिंट की सीडी भी समय पर नहीं मिली है। साथ ही इस बार किताबों में क्यूआर कोड शुरू किया गया है। इस कारण किताबें अभी तक स्कूलों में पूरी नहीं पहुंच सकी हैं।

अब तक नई किताबों का इंतजार

ग्रीष्मावकाश के बाद 19 जून से स्कूल खुल गए हैं, लेकिन अभी तक विद्यार्थियों को सभी विषयों की किताबें नहीं मिल सकी हैं। पाठ्यपुस्तक मंडल से अभी तक पूरी किताबें नहीं आई हैं।

सरकार के नियमानुसार कक्षा 4 से 12 तक विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत किताबें पुरानी ही दी जाती हैं। इनमें से कई बच्चों को ऐसी किताबें मिली हैं, जिनमें पाठ पूरे नहीं हैं।

पाठ्यक्रम में भी बदलाव

विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुरानी किताबों में कई बदलाव हुए हैं, जो विद्यार्थियों को पता नहीं है। पाठ्यक्रम में बदलाव के बाद भी ये पुरानी किताबों के ही सहारे पढ़ाई कर रहे हैं।

किताबों का एडीशन भी करीब दो वर्ष पुराना है। बोर्ड कक्षाओं की किताबें भी विद्यार्थियों को पुरानी ही दी जा रही हैं।

 

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