भाजपा : नहीं उठाए जनता के फोन, तो भुगतना होगा परिणाम

निर्देशों की पालना नहीं करने वाले मंत्री-विधायकों पर आलाकमान की तिरछी नजरें

बीकानेर। जनता के फोन नहीं उठाने वाले मंत्रियों और विधायकों पर आलाकमान की तिरछी नजरें हैं। भाजपा आलाकमान के निर्देशों की पालना नहीं करने वाले मंत्रियों-विधायकों को परिणाम भी भुगतना पड़ सकता है।

राजनीतिक गलियारों से जुड़े लोगों के अनुसार भाजपा आलाकमान ने करीब तीन महीने पहले प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों को अपने मोबाइल फोन खुद रिसीव करने की हिदायत दी थी लेकिन आलाकमान तक पहुंच रहे फीडबैक के अनुसार अनेक मंत्री और विधायक अभी भी अपने मोबाइल फोन खुद नहीं उठा रहे हैं। यह काम उनके निजी सहायकों के जिम्मे ही चल रहा है।

जिले के विधायक भी ऐसा ही कर रहे हैं। सरकार के मंत्रियों और विधायकों के मोबाइल फोन उनके निजी सहायक के पास होते थे और वे ही कॉल रिसीव करते थे लेकिन तीन महीने पहले भाजपा नेतृत्व ने सभी मंत्रियों और विधायकों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपना मोबाइल अपने पास रखें और स्वयं कॉल रिसीव करें।

इसके साथ ही घर और कार्यालय के टेलीफोन यदि वे उपलब्ध नहीं रहते हों तो जिनकी कॉल आई है, उन नम्बरों पर कॉल बैक करें। जानकारी के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री से मिले निर्देशों का पालन करने के लिए पार्टी के सभी विधायकों को अवगत करा दिया गया था।

दरअसल, ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि पार्टी आलाकमान को आरएसएस से फीडबैक मिला था कि ज्यादातर मंत्री और विधायक अपने निजी सहायक को मोबाइल फोन पकड़ा देते हैं और वे लोगों को सही जवाब नहीं देते हैं। जिससे आमजन का सीधा जुड़ाव मंत्री या विधायक से नहीं हो पाता है। लोग मंत्री और विधायकों से दूर होते जा रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने प्रदेश संगठन महामंत्री से इस तरह की शिकायतें भी की थी। इसके बाद मंत्रियों और विधायकों को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे लेकिन अब भी मंत्रियों और विधायकों का पुराना ढर्रा बरकरार है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इन निर्देशों की पालना नहीं करने वाले मंत्रियों और विधायकों को आलाकमान की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है और परिणाम भी भुगतना पड़ सकता है।

 

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