पिछले सप्ताह स्विमिंग के लिए बेटे को एमएम ग्राउंड स्थित राजीव गांधी तरणताल ले जाना हुआ, पूल में पानी देखकर सड़क किनारे बनी गाय के पानी पीने की कुंडिया याद आ गईं। 60 लाख में बना यह स्विमिंग पूल, जिसके पैंदे में हरी काई जमी थी और पानी भी कचरा युक्त और बदबूदार था, बावजूद इस सब के पूल में बच्चे तैर रहे थे। ऐसे हालात पहले भी देख चुकी हूं।
पूल सरकारी है, सिखाने वाले ट्रेनर सरकारी हैंं, बस कुछ प्राइवेट है तो वो हैं पूल की रख रखाव के ठेकेदार, जिनका काम है पानी लगातार बदलना और उसे साफ रखना….न तो बीकानेर के पत्रकारों का ध्यान कभी इस ओर जाता है न खुद तैरने वालो को इस गन्दे पानी की शिकायत करते देखा सुना गया। जो आता है वही आंखे बंद करके नहा कर चला जाता हैै। इस स्विमिंग पूल को “इंसानों की कुंडी” कहा जाए तो बेहतर होगा। कुछ साल पूर्व मैंने इसी पूल में स्विमिंग सीखी थी, अब शायद बेटे को दुबारा वहां ले जाने की हिम्मत न हो।
हम अपने आस-पास कुछ गलत देख कर आंखे मूंद लेने में माहिर हैंं, अब तो पराकाष्ठा है।
— प्रवीणा जोशी, गृहिणी











