तीन मामाओं का भानजा, फिर भी भूखा : गंगाशहर उपनगरीय क्षेत्र

बीकानेर। आजादी के बाद से गंगाशहर उपनगर क्षेत्र से जनप्रतिनिधि नहीं होने का मलाल तो अब क्षेत्र के लोगों के दिमाग से पूरी तरह निकल गया लेकिन अभी भी क्षेत्रवासियों की हालत ‘तीन मामाओं का भानजा, फिर भी भूखा’ जैसी ही है। वर्तमान में इस उप  नगरीय क्षेत्र से सांसद, महापौर एवं नगर विकास न्यास अध्यक्ष होने के बावजूद इस क्षेत्र की समस्याएं घटने के बजाय बढ़ी ही हैं।

 

इस क्षेत्र के तीनों ही जनप्रतिनिधि अपने अब तक के कार्यकाल में कोई ऐसी उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं गिना सकते जिससे जनता के किसी बड़े समूह को परोक्ष-अपरोक्ष फायदा पहुंचा हो। क्षेत्र की बड़े मुद्दों को एकबारगी नजरअंदाज कर दें तो भी छोटी-बड़ी समस्याएं ही तवज्जोह की मोहताज हो रही हैं। गंगाशहर उपनगर के भीनासर, किसमीदेसर, सुजानदेसर एवं श्रीरामसर के आस-पास पिछले करी  ब एक दशक में पनपी बस्तियों के बाशिन्दों को मूलभूत या कहें सामान्य नागरिक सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। इन क्षेत्रों में टूटी सडक़ें, गंदे पानी की निकासी का अभाव, आवारा पशुओं का जगह-जगह जमावड़ा, रात में बंद पड़ी रोडलाइटों के चलते पसरा अंधेरा, कहीं-कहीं दिन में भी उजाला करती रोडलाइटें, नियमित साफ-सफाई के अभाव में जाम नाले-नालियां प्रगति की दौड़ से दूर किसी एकाकी गांव की सी बदहाली की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

क्षेत्र की बड़ी समस्याओं में शुमार यहां का शिव प्रताप पूनमचन्द भट्टड़ राजकीय अस्पताल कहा जा सकता है जिसके एसपी मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध होने के बावजूद आम लोगों को कोई राहत नहीं मिल पाई है। अस्पताल में शुरू होने वाला स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग भवन बनने के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सका। वहीं आपातकालीन सेवाएं शुरू होने में लगातार हो रही देरी आम लोगों पर भारी पड़ रही है। कमोबेश यही स्थिति अस्पताल के बाहर चल रही सब्जी मंडी की है, जिसके चलते आवागमन में रुकावट के साथ अस्पताल में आने-जाने वालों को भी भारी परेशानी का सामना कर पता है।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते तेरापंथ भवन के पास महावीर चौक में भी पिछले करीब एक दशक से नई सब्जीमंडी पनप गई। सब्जीमंडी के साथ यहां निजी कार स्टैंड, खाने-पीने की अस्थाई दुकानों के चलते हर समय जाम की सी स्थिति रहती है। यहां भी आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है जिनसे राहगीर आए दिन चोटिल होते हैं।

गंगाशहर में सुजानदेसर रोड के दोनों ओर पिछले तीन दशक से करीब 50 बीघा क्षेत्र में एकत्रित गंदे पानी की समस्या को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। 29 सितम्बर 2013 को चांदमलजी के बाग क्षेत्र में 624 लाख रुपये की लागत से बने सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं पम्पिंग स्टेशन से भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई। गोचर भूमि में बनी पानी की डिग्गियां ओवर फ्लो हो जाने से पिछले कई महीनों से गंदा पानी करीब 30-40 बीघा क्षेत्र में पसरा पड़ा है। क्षेत्रवासियों को इस गंदे पानी के चलते दुर्गन्ध व मच्छरों से रोजाना दो-चार होना पड़ता है।

देश की आजादी से उत्साहित हो नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए 1947 में स्थापित भीनासर के आजाद क्लब में पिछले दो दशक से खेल गतिविधियां बंद पड़ी हैं। इस क्लब के बैनर तले कई राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं 60 एवं 70 के दशक में हो चुकी हैं। कमोबेश यही स्थिति बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा रतनसिंह की ओर से करीब डेढ़ सदी पहले निर्मित भीनासर के मुरलीमनोहर मंदिर की है। मंदिर परिसर उजाड़ पड़ा है और वहां वीरानी छाई रहती है। मंदिर परिसर में स्थित रियासतकालीन महलात और पिछवाड़े में बने कक्षों की हालत खराब है। भीनासर की करीब पांच दशक पुरानी मुरली मनोहर वाटिका सांसद कोटे से नवीनीकरण के बाद भी बेरौनक पड़ी है। यहां न तो हरी घास है और न ही फुलवारी। बदहाल पार्क के चलते क्षेत्र के बच्चे बहुत ही निराश हैं कि वे छुट्टियों में सुबह-शाम खेलें भी तो कहां खेलें। क्षेत्र के बच्चों ने जनप्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन से भी इस वाटिका की सुध लेने की गुहार लगाई है।

वर्ष-2014 के जून माह में ‘सरकार आपके द्वार’ अभियान के तहत क्षेत्र के खिलाडिय़ों ने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से उपनगर में मल्टी स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स बनाने की गुहार लगाई थी लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हुई। जनप्रतिनिधियों ने भी खिलाडिय़ों की बात को आगे नहीं बढ़ाया। नतीजन आज भी यहां के नवोदित खिलाड़ी खेल मैदान के अभाव में पिछड़े हुए हैं।

क्षेत्र की छोटी-बड़ी ऐसी कई समस्याएं हैं अनछुई हैं लेकिन तीनों जनप्रतिनिधि जहां भी जाते हैं, विकास का उल्लेख करते नहीं अघाते लेकिन अपने क्षेत्र के प्रति इनकी उदासीनता लोगों की समझ से बाहर है।

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