बीकानेर : 84 का दुल्हा, 83 की दुल्हन

हुआ था बाल विवाह, अपने विवाह की उन्हें कोई स्मृति नहीं। इसीलिए स्मृतियों को रिटेक किया 84 की उम्र मेंं 83 वर्ष की अपनी पत्नी को दुल्हन बना फिर से शादी रचा कर। आजकल की शादियों के सभी तामझाम। बारात देख हर कोई ठिठका।

चार पीढ़ियों की मौजुदगी में अनोखी शादी

बीकानेर। कोटगेट क्षेत्र में रहने वाले चेतन गहलोत (84) और कमलादेवी (83) ने अपने वैवाहिक जीवन की नई कहानी लिख दी। नौ वर्ष की उम्र में हुई अपनी शादी की 75वीं सालगिरह पर अपनी हमसफर से फिर से शादी करने वाले चेतन गहलोत की बारात आचार्य चौक से निकल बेसिक कॉलेज के सामने स्थित चित्रा भवन पहुंची। बारात को देखने के लिए रास्तों का यातायात थम गया, लोगों ने जगह-जगह फूलमालाएं पहनाकर शुभकामनाएं दीं।
शादी की 75वीं सालगिरह मनाने के इस अनोखे तरीके को कुछ लोग किसी रिकॉर्ड बुक में शामिल करवाने की तजवीज में भी लगे हैं।  शादी की सालगिरह कई जोड़े भले ही धूमधाम से मनाने लगे हों लेकिन शादी की सारी रस्मों से फिर से गुजरने का उत्साह बिरला ही कोई दिखा पाता है।
चेतन गहलोत के मुताबिक यह शादी उन्होंने दोबारा इसलिए रचाई क्योंकि करीब नौ साल की उम्र में उनकी शादी हो गई जो उन्हें याद ही नहीं। पोते-पोतियों और दोहिते-दोहितियों की शादी के एलबम देखते-देखते खुद की शादी का एलबम बनाने की इच्छा जाग हुई। बस यहीं से दोबारा शादी की स्क्रिप्ट लिखी गई।
प्री-वेडिंग, मेहंदी, भाई-भात जैसी रस्मों से लेकर सात फेरे लेने तक की सारी रस्में दोबारा हुईंं। चेतन गहलोत ने जैसे ही कमलादेवी को वरमाला पहनाई, राजस्थानी का प्रसिद्ध विवाह गीत ‘केसरियो लाडो जीवंतो रह’ विवाह स्थल चित्रा भवन में गूंज उठा।
चेतन गहलोत की बारात में उनसे बड़ी उम्र के कई साथी भी शामिल हुए। आशीर्वाद समारोह में उन्हें आशीर्वाद देने वालों की बजाय पैर छूकर आशीर्वाद लेने वालों की संख्या ज्यादा थी।
photo : Dinesh Gupta

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