80 से अधिक फिल्मों का हो रहा प्रदर्शन

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आचार्य तुलसी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल समारोह का आगाज

गंगाशहर। देश ही नहीं विदेशों तक अपने मन की बात पहुंचाने का एक माध्यम है शॉर्ट फिल्में। इससे समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों, कुरूतियों को दूर करने का एक माध्यम प्राप्त होता है। आजकल के दौड़ते हुए दौर में किसी के पास समय नहीं है और इस कम समय के दौर में शॉर्ट फिल्में अपना एक अलग ही महत्व रखती है। यह विचार आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान, गंगाशहर द्वारा आयोजित तृतीय संस्करण आचार्य तुलसी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में अभिनेता अमित बहल ने कहे। उन्होंने कहा कि बिना किसी आवाज के अपनी बात को जाहिर करना, आमजन तक संदेश पहुंचाना जैसे अनेक कार्य सहज रूप से शॉर्ट फिल्मों से किया जा सकता है।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य रेल प्रबंधक ए.के. दूबे ने कहा कि आचार्य तुलसी के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए उन्हें इस सृष्टि का एक अविभाज्य अंग बताया एवं कहा कि फिल्म फेस्टिवल के लिए बनाई गई फिल्में विचारों के माध्यम से बनाई गई है।
राजुवास के पूर्व कुलपति ए.के. गहलोत ने कहा कि आजकल युवाओं में सोशल मीडिया पर शॉर्ट फिल्मों का बहुतायत चलन चल रहा है। नैतिकता, अहिंसा जैसे विषयों पर बनाई गई शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से युवा वर्ग के सामने बड़ा संदेश दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल युवाओं में मानसिक तनाव बहुत ज्यादा रहता है और इस तनाव को दूर करने में इन फिल्मों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

सेठ तोलाराम बाफना एकेडमी के सीईओ डॉ. पी.एस. वोहरा ने कहा कि आचार्य तुलसी एक महान संत थे। उनके द्वारा दिये गए अवदानों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन करना एक महत्वपूर्ण कदम है। वोहरा ने कहा कि इतने बड़े समारोह में मंच पर बैठना ही एक सम्मान की बात है। इस तरह के कार्यक्रमों से युवा वर्ग को एक प्लेटफॉर्म मिलता है और उन्हें अपने विचारों को जाहिर करने का मौका मिलता है।

फेस्टिवल के पैटर्न सदस्य टी.एम. लालाणी ने कहा कि धर्म में नैतिकता होना बहुत ही जरूरी है। आचार्यश्री तुलसी ने देश में अणुव्रत के माध्यम से देश में नैतिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

स्वागत भाषण देते हुए आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि इस शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में अमेरिका, इराक, बैल्जियम, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से 620 से अधिक फिल्में प्राप्त हुई है। उसमें से चुनिन्दा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया है और देश के अनेक क्षेत्रों से फिल्म प्रोड्यूसर भी बीकानेर पधारे हैं।

आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के सचिव जतनलाल दूगड़ ने आभार ज्ञापित किया। इससे पूर्व शान्ता भूरा द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से फेस्टिवल का प्रारम्भ किया गया। तेरापंथ महिला मण्डल, गंगाशहर द्वारा ‘अणुव्रत गीतÓ का संगान किया गया। तेरापंथ कन्या मंडल द्वारा लोगस पाठ का वाचन कर मुनिश्री तरूणकुमारजी का श्रद्धांजलि अर्पित की।

समन्वयक गोपालसिंह सिंह ने फिल्म फेस्टिवल के संबंध में पूर्ण जानकारी देते हुए उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। फिल्म फेस्टिवल के ज्यूरी प्रसिद्ध नाटक ‘शान्तिÓ और प्रिंस, लक्ष्य तथा अनेक फिल्मों में भूमिका अदा कर चुके कलाकार अमित बहल के अलावा टॉयलेट एक प्रेम कथा की अदाकारा एवं मॉडल खुशबू सावन, निदेशक मोहनदास एवं कलाकार अनुज शर्मा, शिक्षाविद् अशोक चौरडिय़ा मौजूद थे।

समारोह में ”हेलमेट जागरूकताÓÓ पर मुम्बई के निदेशक एम.जे. कौर द्वारा बनाई फिल्म ‘द ब्लू हेलमेटÓ रोहित चौहान द्वारा निर्देशित बाल फिल्म ‘रंग बिरंगा अनारÓ और ईरान की एनिमेशन फिल्म ‘पिसकारपेटÓ का विशेष प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में बैलेंस, चटनी, पारो, फोटोग्राफी, फॉक्स क्राई, पीस, जेबकतरा, इलेक्शन, वाटर, पोतराज आदि शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।

फेस्टीवल में भाग लेने के लिए देशभर के 42 से अधिक फिल्मकार बीकानेर पहुंचे। 02 सितम्बर, 2018 को फेस्टीवल के समापन अवसर पर विजेता फिल्मों को अवार्ड दिए जाएंगे।

समारोह के दौरान मुख्य रेल प्रबंधक ए.के. दूबे को विजय कोचर द्वारा, राजुवास के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के. गहलोत का पारसमल छाजेड़, सम्पत्त दूगड़, देवेन्द्र कोचर व मुरारी शर्मा द्वारा, पैटर्न टी.एम. लालाणी का डॉ.पी.सी. तातेड़ द्वारा, सीईओ पी.सी. वोहरा का मनोहर नाहटा, प्रज्ञा नौलखा, ऐश्वर्या व कोमल चौपड़ा द्वारा स्मृति चिन्ह, जैन पताका व साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

इसी दौरान अभिनेता अमित बहल का अमरचन्द सोनी, निदेशक मोहनदास का बसंत नौलखा, अभिनेत्री खुशबू सावन का सुधा भूरा, अभिनेता अजुन शर्मा का मेघराज बोथरा व शिक्षाविद् अशोक चोरडिय़ा का इन्द्रचन्द्र सेठिया द्वारा जैन पताका पहनाकर सम्मान किया गया। मंच का संचालन संजय आचार्य ने किया।

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