70 साल पुराना है कानून, इसलिए बच जाते हैं सटोरिये

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आईपीएल में सट्टे का खेल

बीकानेर। आईपीएल में पुलिस और सटोरियों का गठजोड़ एक बार फिर सामने आया है। पुलिस ने इस काले कारोबार की छोटी-छोटी मछलियों को जाल में फांसने की कोशिश की है, लेकिन बड़े मगरमच्छों पर हाथ नहीं डाल रही। आईपीएल में सट्टे का खेल 11 साल पुराना है, लेकिन इस पर कार्रवाई का कानून सत्तर साल पुराना है। कानून में जो प्रावधान है उस आधार पर सटोरिए थाने से जमानत पा लेते हैं और फिर से अपनी करतूतों में जुट जाते हैं।

पांच सौ रुपए जुर्माना भरा और फ्री

दरअसल, राजस्थान सार्वजनिक धुत (जुआ) अधिनियम -1949 के तहत ही जुआरियों और सटोरियों पर कार्रवाई की जाती है। कार्रवाई के अनुसार भवन में जुआ खेलते मिलने पर 3/4 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें एक साल का कारावास या पांच सौ रुपए जुर्माना देना होता है। अमुमन पांच सौ जुर्माना देने के बाद सटोरियों और जुआरियों को थाने से ही जमानत दे दी जाती है। यही वजह है कि सट्टेबाज बिना कानून का खौफ खाए अपनी करतूतों को अंजाम देते रहते हैं।

करोड़ों रुपए बरामद

इस बार भी आईपीएल में पुलिस ने प्रदेश में कई कार्रवाइयां की, लेकिन ये पिछले वर्षों में की गई कार्रवाइयों से काफी कम हैं। इस बार बीकानेर, जयपुर, उदयपुर, सीकर सहित कई जिलों में सौ से ज्यादा सटोरियों को दबोचा गया, लेकिन इनमें बड़ा सटोरिया कोई नहीं रहा। इससे जाहिर हो जाता है कि पुलिस ने बड़े सटोरियों पर हाथ डालने की कोशिश नहीं की है।

जानकारी के मुताबिक इस वर्ष की गई कार्रवाई में पुलिस ने करीब दो करोड़ रुपए की राशि बरामद की और तकरीबन दस करोड़ रुपए से ज्यादा के हिसाब की सट्टा पर्चियां पुलिस को मिली हैं।

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