हर्षवर्धन की फोटो प्रदर्शनी आज

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प्रकृति और वन्यजीव पर है केन्द्रित

बीकानेर। दरअसल फोटोग्राफी एक आर्ट तो है ही साथ किसी भी पल का जीवंत दस्तावेज। कहा भी गया है कि एक तस्वीर हजार शब्दों को अभिव्यक्त करती है। हालांकि एंड्रॉयड फोन के कैमरे ने फोटोग्राफी आर्ट को सेल्फी तक लाकर समेट दिया। व्यक्ति नारसिस्ट हो चला और इस चक्कर में प्रकृति से दूर भी होता चला गया। लुप्त होते जंगलों के बीच कंक्रीट के जंगल पनपते गए।

कमाल ये रहा कि उन कंक्रीट के जंगलों में भी फोटो एक्जीबशन के जरिए ही सही प्रकृति और वन्य जनजीवन की बातें होती रही। लेकिन छोटे शहरों में ऐसी एक्जीबशन का भी मौका ना के बराबर ही आता है। ऐसे में युवा फ़ोटोग्राफर हर्षवर्धन की ये पहल निश्चित ही सराहनीय है। हालांकि फोटोग्राफ किस स्तर के है और सेण्ट्रल थीम क्या है, ये कल ही पता चल सकेगा।

माइक पाण्डेय और रतिका रामास्वामी जैसे वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर ने लोगों का ध्यान खींचा है। बीकानेर में हालांकि कुछ बेहतरीन फोटोग्राफर हैं लेकिन अभी तक वाइल्ड लाइफ को लेकर वनविभाग के स्तर पर तो एक्जीबशन का आयोजन हुआ है लेकिन सोलो फोटोग्राफर की कोई प्रदर्शनी ध्यान में नहीं आती। ऐसे में थोड़ी भी रुचि रखने वाले लोगों के लिए हर्षवर्धन गोदारा का प्रयास आकर्षण का केन्द्र रहेगा।

आज सूरसागर के समीप जूनागढ पर 11 से 6 बजे तक इस फोटो प्रदर्शनी का आयोजन होगा। प्रदर्शनी में कई वरिष्ठ अधिकारी, वन्य जीव प्रेमी और प्रबुद्धजन हिस्सा लेंगे।

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