येदुरप्पा की शपथ पर सुप्रीम कोर्ट की रोक नहीं

बीकानेर। कर्नाटक में येदुरप्पा के शपथ ग्रहण रोकने के लिए कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में की गई याचिका पर बुद्धवार रात पौने दो बजे तीन जजों की बैंच ने सुनवाई की। कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने दलील देते हुए राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी और कहा कि राज्यपाल ने रात नौ बजे ही शपथ का न्यौता क्यों दिया। मनुसिंघवी ने सरकारिया कमीशन का हवाला दिया और बोम्मई केस का जिक्र भी किया। साथ ही उन्होंने कुमार स्वामी की लिस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस – जेडीएस के पास 117 सीटें है और भाजपा के पास 104 सीट, फिर भी हमें सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया। येदुरप्पा ने बहुमत साबित करने के लिए 7 दिन मांगे , उन्हें 15 दिन मिले। ये संवैधानिक पाप है, इससे खरीद-फरोख्त बढ़ेगी। मनुसिंघवी ने कहा कि मेघालय, गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। गांव केस में चुनाव बाद गठबंधन को मौका दिया। सिंघवी ने शपथ ग्रहण दो दिन टालने की अपील की। पूर्व अटॉर्नी जनरल ओर येदुरप्पा के वकील मुकुल रोहतगी ने तर्क देते हुए कहा कि राज्यपाल को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 361 का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती है। राज्यपाल के आदेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। सबसे ज्यादा विधायक वाली पार्टी को न्यौता दिया गया है। राज्यपाल को संवैधानिक दायित्व से रोक नहीं सकते। राष्ट्रपति, राज्यपाल कोर्ट के प्रति जवाबदेह नहीं है। रोहतगी ने केस को खारिज करने की अपील की। केन्द्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि किसने किसको समर्थन दिया, हमे नहीं पता। समर्थन की चिट्ठी पर किस विधायक के हस्ताक्षर है, ये भी नहीं पता। भाजपा को विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए। जजों ने कांग्रेस के अधिवक्ता से जब समर्थन वाली चिठ्ठी मांगी। तो उन्होंने कहा कि समर्थन वाली चिठ्ठी उनके पास नहीं है। दलीलें ओर तर्क सुनने के बाद तीनों जज़ एक कमरे में चले गए और कुछ देर तक आपस मे चर्चा करने के बाद कांग्रेस की याचिका खारिज किये जाने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट की बैंच में जस्टिस ए. के.सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अरविंद बोबडे थे।

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