बीकानेर से चला ये सिलसिला अब अपने अंतिम चरण में है। कभी HMV ने जगजीतसिंह के साथ रिकॉर्ड में दूसरी ओर सुरेश राजवंशी की भी दो गज़लें रखी थींं। खुद जगजीतसिंह भी बीकानेर जिले से जुड़े गंगानगर के थे, ये संयोग भी कम नहीं है। संयोग का सिलसिला तवील है, पहले किस पर बात करें, समझ नहीं आता।
सुरेश राजवंशी जिस गीत को इस वीडियो में आवाज़ दे रहे हैं, वह कफील आज़र का लिखा है। ये वही कफ़ील आज़र हैं जिनकी लिखी नज़्म ‘बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी….’ को जगजीत सिंंह ने गाया, उसके बाद तो उनका गाया सब कुछ क्लासिक हो गया।
सुरेशजी जिस अभिनेता ‘राजदीप’ को आवाज़ दे रहे हैं उनका मूल नाम ‘रशीद खान’ था, जिनका निवास बीकानेर के धोबीतलाई मोहल्ले मेें था।
राजदीप ने इस फ़िल्म के अलावा चेतन आनन्द की ‘हकीकत’, विमल रॉय की ‘बन्दिनी’, महबूब खान की ‘सन ऑफ इंडिया’, आई एस जोहर की ‘मैं शादी करने चला’ व एक अन्य फ़िल्म ‘बाबर’ में भी अभिनय किया था।
बीकानेर का वह कैसा दौर था ज़रा कल्पना करें। कैसी दीवानगी, कैसा समर्पण। आज बहुत सुविधाएँ है, नेटवर्क है, उस ज़माने में सिर्फ जुनून होता था और भीतर इस शहर की तासीर जो अकाल को भी राग में लेता था।
–अनिरुद्ध उमट कवि-कहानीकार











