बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से यूंं तो सियासी समीकरणों को साध कर डॉ. बीडी कल्ला टिकट लाने में कामयाब होते रहे हैं। पांच बार विधायक रहे कल्ला की इन दिनों अशोक गहलोत कैम्प से नजदीकी जगजाहिर है। कल्ला सक्रिय भी दिख रहे हैं, बिजली के निजीकरण से लेकर गाय-गोधों के आंदोलन में भी कल्ला सक्रिय देखे गए।
कांग्रेस में एक ही समय प्रतिपक्ष नेता और प्रदेशाध्यक्ष का पद संभालने वाले डॉ. कल्ला ने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1980 में की और कहा जाता है कि अपने ही सियासी गुरु डॉ. गोपाल जोशी को पटखनी टिकट लाने में ही दे दी थी। 1980 से कल्ला एक 1993 को छोड़ पांच बार लगातार जीते।
परिसीमन के बाद क्षेत्र में आए बदलाव के बाद 2008 में उन्हीं गोपाल जोशी ने भाजपा से टिकट ला कर बीडी कल्ला को करारी शिकस्त दी। 2013 में हार का अंतर जरूर कम हुआ लेकिन जीत का दरवाजा उनके लिए फिर नहीं खुला।
वर्ष के अंत में चुनाव फिर सामने है। कल्ला फिर कोशिशों में जुटे है। हालांकि कल्ला परिवार ने बीकानेर पश्चिम में कांग्रेस के किसी नए चेहरे को पनपने नहीं दिया। सियासत में यह कोई नई रणनीति नहीं है, सभी बड़े नेताओं का गणित यही होता है। लेकिन यह भी सच है कि घुटन में ही आक्रोश पनपता है, जो नया लीडर तैयार कर देता है। हालांकि पश्चिम में अभी ऐसी सम्भावनाए कम ही दिख रही है।
लेकिन कभी कल्ला कैम्प में रहे राजकुमार किराड़ू ने कल्ला कैम्प से बगावत का झंडा गांधीवादी तरीके से उठाया है। किराड़ू ना प्रभावशाली वक्ता हैं और नि ही चामत्कारिक व्यक्तित्व लेकिन मृतक के ब्लाक अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में किराड़ू यह दिखाने में कामयाब रहे कि मोतीलाल वोरा का सहज सहयोग उन्हें ही प्राप्त है।
ऐसे में हो सकता जो 1980 में बीडी कल्ला ने जो गोपाल जोशी के साथ किया, किराड़ू उसे दोहराने की कोशिश जरूर करेंगे। वहीं बाबू जयशंकर जोशी, महेश व्यास सहित कुछ और भी इस बार भी हमेशा की तरह प्रयासरत है ।
इसमें दो राय नहीं कि कांग्रेस में डॉ. कल्ला का अपना वजूद है लेकिन लगातार दो बार की चुनावी हार ने कल्ला का कद कम जरूर किया है।
वही प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी और कल्ला के रिश्ते भी जगजाहिर हैं। कांग्रेस के भीतर किचकिच किसी से छिपी नहीं है, धड़ेबाजी के भी अपने गणित हैं, बावजूद इन सबके आज के सियासी समीकरणों में कांग्रेस के भीतर टिकट चाहने वालों पर डॉ. कल्ला 21 ना सही, 20 तो हैं ही……
(खबर द न्यूज डेस्क)











