देश की राजनीति मण्डल, कमंडल से होती हुई इन दिनों कलश पर आ गई है। अटल बिहारी वाजपेयी के सहारे सहानुभूति बटोर कर चुनावी नैय्या पार लगाने के लिए भाजपाइयों ने अटलजी की अस्थियों को ही सेतु बना डाला।
कांग्रेसियों ने सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन हाँ कांग्रेस समर्थकों ने खूब सोशल मीडिया पर चुटकी ली। उन्हें क्या पता था की राजस्थान की राजनीति में भी कलश प्रवेश कांग्रेस करने वाली है। इसमें कतई सन्देह नहीं है प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी की पैठ है। खासतौर पर किसान बाहुल्य इलाके में लेकिन जाने उनकी किचन कैबिनेट में कौन लोग हैं जो अच्छे भले नेता से गम्भीर मुद्दे पर भी ऐसे पब्लिसिटी स्टंट करा डालते हैं कि राम-राम। राज्य में किसान परेशान है कुछ वाजिब मांगें और मुद्दे हैं। खासतौर पर छोटे किसानों के लेकिन न जाने किसने सलाह दे दी कि प्रतिपक्ष नेता को कि कलश का सहारा जरूरी है। कलशों में 11 नदियों का पानी मंगवा कर संकल्प लिया जाए।
मौका था प्रतिपक्ष नेता के जयपुर स्थित आवास से किसान जागरण की शुरुआत का। भीड़ भी खूब जुटी करीब 15 हजार लोगों के जुटने का दावा किया गया। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की विफलता को लेकर 20 पेज का फोल्डर भी जारी किया। किसानों के कर्जे माफी से लेकर युवाओं की बेरोजगारी पर बात हुई । 11 प्रमुख नदियों के जल को साक्षी मानकर भाजपा के कुशासन के अंत और किसान सशक्तिकरण का प्रण लिया गया। प्रण भी ऐसे-वैसे नहीं लिया गया। इंदिरा गांधी नहर, माही, सोम, जाखम, चम्बल, नर्मदा, चन्द्रभागा, परवन, आहु, बनास और काली सिंध के पानी को एक कलश में मिलाकर आचमन किया गया। पानी भी बकायदा महिलाएं कलश में लेकर आई थीं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बीडी कल्ला पंडित की भूमिका में रहे मंत्रोच्चार करवाकर डूडी को संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहडिय़ा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नारायण सिंह, चन्द्रभान, पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल, अश्क अली टाक, विधायक भंवरसिंह भाटी, बीकानेर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष महेन्द्र गहलोत तथा बिशनाराम सियाग मौजूद रहे। इस मौके पर किसान रथ का भी लोकार्पण किया जो किसान जागरण के लिए गांव गांव घूमेगा।
चुनावी साल में निश्चित तौर पर किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस भले ही भाजपा को घेरने का प्रयास करे लेकिन अब बैठे-बैठाये कलश पॉलिटिक्स का दौर रामेश्वर डूडी ने कांग्रेस में भी शुरू कर दिया।
नकल कांग्रेस की आदत रही है। वाजपेयी जी के अस्थि कलशों के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग हुआ। अब कांग्रेस खुद कलश का सहारा ले रही। कलश और कास्ट पॉलिटिक्स पर नहीं जनता विकास और मुद्दों पर वोट करती है। किसान सब समझ चुका है 48 साल में कांग्रेस कुछ नहीं कर पाई फसल की लागत, जोखिम और कीमत सब पर मोदी सरकार ने काम किया है। फसल बीमा योजना से लेकर किसानो से जुड़े हर मुद्दे पर काम हुआ है।
सतीश पूनिया, भाजपा प्रवक्ता













